जस्टिस सूर्यकांत बने भारत के 53वें CJI, राष्ट्रपति ने दिलाई शपथ, माता-पिता से लिया आशीर्वाद; कार्यकाल लगभग 15 महीने का

नई दिल्ली (शिखर दर्शन) // भारत के सुप्रीम कोर्ट में नया अध्याय शुरू हुआ है। जस्टिस सूर्यकांत भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) बन गए हैं। राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। शपथ लेने के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात की। इस अवसर पर ब्राजील समेत सात देशों के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीश भी मौजूद रहे।
शपथ ग्रहण के तुरंत बाद नए CJI ने अपने माता-पिता के पैर छूकर आशीर्वाद लिया, जो उनके विनम्र व्यक्तित्व का परिचायक है।
सीजेआई का कार्यकाल और अहम फैसले
जस्टिस सूर्यकांत ने जस्टिस बीआर गवई की जगह ली है और लगभग 15 महीने तक इस पद पर कार्य करेंगे। 9 फरवरी 2027 को 65 वर्ष की आयु पूरी होने पर वे मुख्य न्यायाधीश के पद से रिटायर हो जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कई संवैधानिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिनमें आर्टिकल 370, पेगासस जासूसी मामले, बोलने की आज़ादी और बिहार की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से जुड़े मामलों में अहम फैसले शामिल हैं। वे उस बेंच का हिस्सा भी रहे जिन्होंने प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर सुनवाई की, जिसमें राज्य विधानसभा द्वारा पास किए गए बिलों पर गवर्नर और राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमा की जांच की गई।
बिहार के ड्राफ्ट वोटर लिस्ट मामले में जस्टिस सूर्यकांत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह 65 लाख छूटे हुए वोटरों की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को उपलब्ध कराए, ताकि राज्य में चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में आवश्यक सुधार किया जा सके।
जस्टिस सूर्यकांत की व्यक्तिगत जानकारी
नए मुख्य न्यायाधीश का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता मदनमोहन शास्त्री संस्कृत शिक्षक और प्रसिद्ध साहित्यकार थे, जबकि माता शशि देवी गृहिणी हैं। जस्टिस सूर्यकांत परिवार में सबसे छोटे हैं, उनके बड़े भाई ऋषिकांत शिक्षक, शिवकांत डॉक्टर और देवकांत आईटीआई से रिटायर हैं। बहन कमला देवी हैं।
उन्होंने 10वीं तक गांव में पढ़ाई की और इसके बाद पहली बार शहर का अनुभव किया। परिवार के अनुसार, उनके पिता चाहते थे कि वे इंजीनियर बनें, लेकिन सूर्यकांत ने कानून की पढ़ाई चुनी। वे आज भी अपने गांव से जुड़े हुए हैं और हर साल गांव के स्कूल के टॉपर्स को सम्मानित करने आते हैं।
परिवार

जस्टिस सूर्यकांत की पत्नी सविता सूर्यकांत हैं, जो कॉलेज प्रिंसिपल के पद से रिटायर हैं और इंग्लिश की प्रोफेसर रही हैं। उनकी दो बेटियां हैं—मुग्धा और कनुप्रिया, जो पढ़ाई कर रही हैं। विवाह 1987 में जींद की सविता शर्मा से हुआ था। परिवार ने बताया कि विवाह के समय जस्टिस सूर्यकांत ने दहेज नहीं लिया।



