आरटीओ में भ्रष्ट सिस्टम का खेल: 15 हज़ार 5 सौ रूपये जमा करने के बाद भी नहीं मिला नंबर, आवेदक को जाना पड़ा कोर्ट

इंदौर में आरटीओ की फैंसी नंबर नीलामी में घोटाले का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, अधिकारी फटकार झेलने को मजबूर
इंदौर (शिखर दर्शन) // इंदौर आरटीओ में फैंसी नंबर की नीलामी में गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (इंदौर बेंच) तक पहुंच गया है। याचिकाकर्ता को ₹15,500 जमा करने के बावजूद मनमाने तौर पर रूटीन नंबर एमपी-09 BW 6046 जारी कर दिया गया, जबकि वह फैंसी नंबर एमपी-09 AU 0101 का हकदार था।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा ने आरटीओ अधिकारियों को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ता को सफल बोलीदाता घोषित किया गया है और उसने पूरी राशि जमा कर दी है, तो उसे उसका हकदार नंबर तुरंत जारी किया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आरटीओ अधिकारी आवेदन की जांच करें और याचिकाकर्ता के दावे सही पाए जाने पर फैंसी नंबर तुरंत जारी करें। यदि किसी कारणवश नंबर जारी नहीं किया जा सकता है, तो कारण सहित लिखित आदेश दिया जाए।
मामले की सच्चाई:
याचिकाकर्ता ने 7 अक्टूबर 2025 को 15,000 रुपए की बेस प्राइस जमा की और 13 अक्टूबर को 500 रुपए की शेष राशि जमा की। 9 अक्टूबर को शाम 5:45 बजे उसे सफल बोलीदाता घोषित किया गया, लेकिन आरटीओ ने न तो अलॉटमेंट वेबसाइट पर अपलोड किया और न ही मेल के माध्यम से कोई सूचना दी। कई आवेदन और ईमेल के बावजूद भी आरटीओ ने कोई जवाब नहीं दिया, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा।
भ्रष्टाचार की जड़ तक मामला:
आरटीओ में फैंसी नंबर की नीलामी से हर महीने लाखों रुपए की वसूली होती है, लेकिन सीधे आवेदन करने वाले नागरिकों को सही नंबर पाने के लिए कोर्ट का रुख करना पड़ता है। वहीं, दलालों के जरिए काम कराने वाले मिनटों में नंबर हासिल कर लेते हैं। सवाल यह उठता है कि क्या हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद परिवहन मंत्री आरटीओ के इस भ्रष्ट नेटवर्क पर कार्रवाई करेंगे, या फैंसी नंबरों की यह “फर्जी नीलामी” यूं ही जारी रहेगी।



