सीमेंट यूनियनों में फर्जीवाड़े का आरोप: शंकर सिंह निर्मलकर ने उज्जवल दत्ता के खिलाफ एफआईआर की मांग की

रायपुर (शिखर दर्शन) // प्रदेश के सीमेंट उद्योगों में श्रमिक यूनियनों के नाम पर हो रहे कथित फर्जीवाड़े और शोषण को लेकर अखिल भारतीय श्रमिक संगठन से जुड़े शंकर सिंह निर्मलकर ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि प्रदेश के कई सीमेंट उद्योगों में इंटक यूनियन के नाम पर फर्जी तरीके से यूनियन संचालित की जा रही है, जो प्रबंधन के साथ मिलीभगत कर मजदूरों का शोषण कर रही है।
श्री निर्मलकर ने बताया कि रायपुर सहित बलौदाबाजार-भाटापारा क्षेत्र के बैकुंठ, हिरमी, रावन और कुकुरदी स्थित सीमेंट उद्योगों में इंटक यूनियन के पदाधिकारी वर्षों से बिना किसी चुनाव के पदों पर बने हुए हैं। बैकुंठ सीमेंट वर्क्स में पंजीयन क्रमांक 49 के तहत इंटक यूनियन का संचालन लंबे समय से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किया जा रहा है। पहले रोबिन दत्ता अध्यक्ष रहे और उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र उज्जवल दत्ता को बिना किसी निर्वाचन के अध्यक्ष बना दिया गया।
निर्मलकर ने आरोप लगाया कि मृत व्यक्ति के नाम से भी पंजीयक व्यवसायिक संघ, छत्तीसगढ़ को गलत दस्तावेज जमा किए गए, और इसकी शिकायत कई बार करने के बावजूद विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यह स्थिति पंजीयक कार्यालय और उद्योग प्रबंधन की मिलीभगत को दर्शाती है।
उन्होंने यह भी बताया कि बैकुंठ सीमेंट में कार्यरत छन्नू कुर्रे, जो यूनियन का महासचिव है, उसे बिना काम किए घर बैठकर वेतन और भत्ते दिए जा रहे हैं। इसी तरह ग्रासीम रावन सीमेंट में राजभान सिंह और थानू वर्मा, जबकि हिरमी सीमेंट में अनुपम अग्रवाल और बिरेंद्र जयसवाल वर्षों से इंटक यूनियन के पदाधिकारी बनकर मजदूरों के शोषण में प्रबंधन का साथ दे रहे हैं।
निर्मलकर ने मांग की है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी को इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करते हुए फर्जी यूनियन संचालित करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर प्रतिबंध लगाना चाहिए, ताकि मजदूरों के हितों की रक्षा हो सके।
इसी संदर्भ में शंकर सिंह निर्मलकर ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायपुर को लिखित आवेदन देकर उज्जवल दत्ता (निवासी भिलाई) के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि दत्ता ने यूनियन संचालन में भारी वित्तीय अनियमितताएं और श्रमिक प्रतिनिधियों के साथ धोखाधड़ी की है।
निर्मलकर के अनुसार, सेंचुरी सीमेंट वर्कर्स यूनियन निपान-नीमचा के प्रतिनिधि उज्जवल दत्ता ने कई बार “फॉर्म 49” का दुरुपयोग कर फर्जी रसीदें तैयार कीं और श्रमिकों से ₹600 से ₹1000 तक की राशि वसूली, जो यूनियन खाते में जमा नहीं की गई। यह गंभीर वित्तीय अनियमितता है जिससे श्रमिक वर्ग की छवि धूमिल हुई है।
उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले में तत्काल जांच कर आरोपी पर एफआईआर दर्ज की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि मजदूरों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा हो सके।



