बिलासपुर रेल हादसा : ये हैं असली हीरो… गांव के 6 युवकों ने बचाव दल से पहले पहुंचकर कई यात्रियों की बचाई जान

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में लाल खदान स्टेशन के पास मंगलवार को हुए भीषण रेल हादसे में गांव ढेका के कुछ युवकों ने जिस हिम्मत और इंसानियत का परिचय दिया, उसने सबका दिल जीत लिया। हादसे के तुरंत बाद अफरा-तफरी के बीच सोनू बघेल, कमलेश पात्रे, सोदान पात्रे, भैरव निषाद, जितेंद्र गेन्दले और संतोष मौके पर सबसे पहले पहुंचे। ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतर चुके थे और यात्री मलबे में फंसे थे।
इन युवकों ने बिना किसी डर के घायलों को बाहर निकाला और आसपास के वाहनों से अस्पताल पहुंचाया। एक दो साल के बच्चे को भी मलबे में फंसा पाया गया, जिसे युवकों ने सुरक्षा उपकरणों के बिना बाहर निकालने की कोशिश की। बाद में बचाव दल ने बच्चे को सुरक्षित निकाला। इस दौरान युवाओं ने सोशल मीडिया के जरिए घायलों की जानकारी परिजनों तक पहुंचाई, जिससे कई परिवारों को राहत मिली।

हादसे में मृतकों और घायलों की जानकारी
गाड़ी संख्या 68733 गेवरारोड-बिलासपुर मेमू लोकल ट्रेन और मालगाड़ी की टक्कर में अब तक 11 यात्रियों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मृतकों में लोको पायलट विद्या सागर, प्रमिला वस्त्रकार, अंकित अग्रवाल, प्रिया चंद्रा और शीला यादव शामिल हैं।
घायल यात्रियों में शामिल हैं: मथुरा भास्कर (55), चौरा भास्कर (50), शत्रुघ्न (50), गीता देबनाथ (30), मेहनिश खान (19), संजू विश्वकर्मा (35), सोनी यादव (25), संतोष हंसराज (60), रश्मि राज (34), ऋषि यादव (2), तुलाराम अग्रवाल (60), अराधना निषाद (16), मोहन शर्मा (29), अंजूला सिंह (49), शांता देवी गौतम (64), प्रीतम कुमार (18), शैलेश चंद्र (49), अशोक कुमार दीक्षित (54), नीरज देवांगन (53), राजेंद्र मारुति बिसारे (60)।
मुआवजा और सहायता
रेलवे ने मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपये, गंभीर घायलों को 5 लाख और सामान्य घायलों को 1 लाख रुपये देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मृतकों के परिवार को 5 लाख और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की।
जांच CRS स्तर पर होगी
रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) स्तर पर हादसे की जांच कराई जाएगी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दुर्घटना गटौरा और बिलासपुर के बीच सिग्नल या लाइन-स्विचिंग में तकनीकी त्रुटि के कारण हुई बताई जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
इस हादसे में गांव के 6 युवकों की बहादुरी और तत्परता ने कई यात्रियों की जान बचाई, जिन्हें अब असली हीरो के रूप में याद किया जा रहा है।



