SIR शुरू: छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल समेत 12 राज्यों में कल से विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण, विपक्षी दलों का विरोध जारी

रायपुर ( शिखर दर्शन ) // भारत निर्वाचन आयोग ने 4 नवंबर 2025 से 12 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस प्रक्रिया में छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप शामिल हैं।
हालांकि इस प्रक्रिया को लेकर कई विपक्षी दलों ने विरोध जताया है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु से लेकर केरल तक सत्तारूढ़ और विपक्षी दल निर्वाचन आयोग के इस कदम पर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), डीएमके और अन्य पार्टियां इसे मतदाताओं के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला बता रही हैं।
तमिलनाडु: डीएमके सुप्रीम कोर्ट जाएगी
तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके ने SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अन्य दलों के साथ बैठक कर इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। डीएमके का कहना है कि विधानसभा चुनाव 2026 से पहले यह प्रक्रिया चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इसे चुनाव के बाद ही लागू किया जाना चाहिए। बैठक में कांग्रेस, MDMK, वामपंथी दल, मक्कल नीधि मय्यम, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, कोंगुनाडु मक्कल देसिया काची, तमिलागा वाझ्वुरिमई काची और डीएमके के वैचारिक संगठन द्रविड़ार कषगम के प्रतिनिधि शामिल थे।
पश्चिम बंगाल: TMC का विरोध और मार्च
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) 4 नवंबर को कोलकाता में SIR के विरोध में मार्च निकाल रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं इस मार्च का नेतृत्व करेंगी। TMC का आरोप है कि यह विशेष गहन पुनरीक्षण “खामोशी से की जाने वाली धांधली” है और इसे रोकने के लिए पार्टी हर संभव कदम उठाएगी।
केरल: लेफ्ट सरकार का विरोध
केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने भी SIR का विरोध किया है। उनका कहना है कि स्थानीय निकाय चुनावों के नजदीक इसे लागू करना उचित नहीं है। राज्य सरकार ने निर्वाचन आयोग से इस फैसले की समीक्षा करने का अनुरोध किया है।
कांग्रेस और सपा की भूमिका
कांग्रेस इस प्रक्रिया पर लगातार हमलावर है। राहुल गांधी ने बिहार में SIR के विरोध में वोटर अधिकार यात्रा निकाली थी और आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया विपक्षी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश है।
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी SIR में जातीय जनगणना जोड़ने की मांग की है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव का कहना है कि यह एक बड़ी एक्सरसाइज है और इसे जनसंख्या और जातीय आंकड़ों के सही मिलान के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
प्रथम चरण: प्रक्रिया और समयसीमा
- जिनका नाम 2003 के SIR में है, उन्हें दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं।
- केवल 5-6 प्रतिशत मतदाताओं को दस्तावेज देने होंगे।
- मतदाता किसी भी असुविधा पर हेल्पलाइन नंबर 1950 या BLO कॉल रिक्वेस्ट के माध्यम से सहायता ले सकते हैं।
- मुद्रण प्रशिक्षण: 28.10.2025 – 03.11.2025
- घर-घर गणना चरण: 04.11.2025 – 04.12.2025
- मसौदा मतदाता सूची प्रकाशन: 09.12.2025
- दावे और आपत्ति: 09.12.2025 – 08.01.2026
- नोटिस चरण सुनवाई और सत्यापन: 09.12.2025 – 31.01.2026
- अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन: 07.02.2026
छत्तीसगढ़ में बीएलओ द्वारा घर-घर सर्वे के दौरान 71 प्रतिशत मिलान हुआ है। एन्यूमरेशन चरण में यह मिलान 94-95 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य है। केवल शेष बचे मतदाताओं से दस्तावेज मांगे जाएंगे। मतदाता सूची में लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं हैं, जिनमें से कई शादी के बाद स्थानांतरित हो चुकी हैं।
निर्वाचन आयोग की अपील
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी छत्तीसगढ़ के कार्यालय ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे पुनरीक्षण के दौरान अपने बूथ स्तरीय एजेंटों (BLAs) के माध्यम से कर्मचारियों को सहयोग दें ताकि सभी पात्र मतदाताओं के नाम सूची में जोड़े जा सकें और मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें।



