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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का पहला बड़ा बयान: कहा – वैध सरकार बनी तो ही लौटूंगी, अवामी लीग पर प्रतिबंध लोकतंत्र के लिए घातक

नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) // बांग्लादेश में अगस्त 2024 में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद देश छोड़ने पर मजबूर हुईं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने निर्वासन के बाद पहली बार मीडिया से खुलकर बात की है। भारत में बीते डेढ़ वर्ष से शरण ले रहीं 78 वर्षीय हसीना ने अपने इंटरव्यू में बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, आगामी आम चुनाव, अवामी लीग पार्टी पर लगे प्रतिबंध, अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों और भविष्य की योजनाओं पर स्पष्ट रूप से अपनी बात रखी।

हसीना ने कहा कि वह दिल्ली में स्वतंत्रता के साथ रह रही हैं, लेकिन अपने परिवार के अतीत को देखते हुए सतर्क भी रहती हैं। उन्होंने अपने देश लौटने की इच्छा जताते हुए कहा कि वह तभी बांग्लादेश लौटेंगी जब वहां की सरकार वैध होगी, संविधान का सम्मान किया जाएगा और कानून-व्यवस्था कायम होगी।


अवामी लीग पर बैन आत्मघाती कदम बताया

हसीना ने कहा कि अवामी लीग पर प्रतिबंध न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि आत्मघाती कदम है। उन्होंने कहा, “अवामी लीग के बिना चुनाव कराना देश में विभाजन के बीज बोने जैसा है। लाखों लोग इस पार्टी के समर्थक हैं। यदि उन्हें मताधिकार से वंचित किया गया, तो लोकतंत्र का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।”

उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की है कि जब तक अवामी लीग को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिलती, तब तक वे आगामी आम चुनाव का बहिष्कार करें। हसीना ने चेतावनी दी कि यदि 2026 के चुनाव में अवामी लीग को भाग लेने की अनुमति नहीं दी गई, तो करोड़ों लोग मतदान का बहिष्कार करेंगे।


“बांग्लादेश का भविष्य संविधान और स्थिरता में है”

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि अवामी लीग बांग्लादेश की राजनीति में फिर वापसी करेगी — चाहे सत्ता में हो या विपक्ष में। उन्होंने कहा, “मुद्दा मेरे या मेरे परिवार का नहीं है। बांग्लादेश का भविष्य तभी सुरक्षित होगा जब शासन संविधान के अनुसार और राजनीति स्थिरता के साथ चलेगी। कोई एक व्यक्ति या परिवार देश का भविष्य तय नहीं कर सकता।”


आपराधिक आरोपों को बताया राजनीतिक साजिश

शेख हसीना ने अपने खिलाफ चल रहे मामलों पर कहा कि ये पूरी तरह राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित हैं। बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने 2024 में छात्र विरोध प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई के आरोप में उनके खिलाफ ट्रायल पूरा कर लिया है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई से अगस्त 2024 के बीच करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी और हजारों घायल हुए थे, जिनमें अधिकांश सुरक्षा बलों की गोलीबारी से जख्मी हुए थे। अभियोजन पक्ष ने हसीना पर विपक्षी कार्यकर्ताओं के अपहरण, टॉर्चर और गुप्त हिरासत का आदेश देने का आरोप लगाया है।

हालांकि, हसीना ने सभी आरोपों से इनकार किया और कहा, “यह एक दिखावा है, राजनीति से प्रेरित कार्रवाई है। मुझे अपना बचाव करने का कोई मौका नहीं दिया गया। ये फैसले पहले से तय ‘कंगारू अदालतों’ में सुनाए जा रहे हैं।”


अवामी लीग पर प्रतिबंध और मौजूदा सियासी परिदृश्य

बांग्लादेश में करीब 12.6 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। दशकों से अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) देश की राजनीति पर हावी रही हैं। मगर मई 2025 में चुनाव आयोग ने अवामी लीग का पंजीकरण निलंबित कर दिया था।

नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे और पार्टी नेताओं पर युद्ध अपराधों के आरोपों का हवाला देते हुए अवामी लीग की सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद से ही देश में राजनीतिक अस्थिरता और ध्रुवीकरण का माहौल बना हुआ है।


दिल्ली में निर्वासन, मगर देश की चिंता कायम

शेख हसीना ने कहा कि भले ही वह भारत में आजादी से रह रही हैं, लेकिन उनका दिल आज भी बांग्लादेश की जनता के साथ है। उन्होंने कहा, “मैं अपने देश लौटना चाहती हूं, पर केवल तब जब वहां की सरकार वैध होगी और संविधान का शासन होगा। लोकतंत्र की बहाली ही बांग्लादेश का असली भविष्य है।”


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