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Chhath Puja 2025: डूबते सूर्य को अर्घ्य आज, घाटों पर गुंजेंगे ‘छठ मइया’ के जयकारे — शाम 5:10 से 5:48 के बीच रहेगा शुभ मुहूर्त

छठ महापर्व की भक्ति और आस्था आज अपने चरम पर है। देशभर में गंगा, यमुना, नर्मदा, सोन और अन्य पवित्र नदियों के घाटों से लेकर तालाबों और जलाशयों तक श्रद्धा का सागर उमड़ पड़ा है। पारंपरिक गीतों और लोकधुनों की गुंज के बीच बांस की सूप-टोकरियों में प्रसाद, फल और दीपक सजे हैं। व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर अब डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी में हैं।

शाम 5:10 से 5:48 के बीच डूबते सूर्य को अर्घ्य का शुभ समय
आज यानी 27 अक्टूबर की शाम 5:10 बजे से 5:48 बजे तक सूर्य को सायंकालीन अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त रहेगा। इस समय व्रती जल में उतरकर सूर्यदेव को नमन करेंगे और ‘ॐ सूर्याय नमः’ के मंत्रोच्चार के साथ आस्था का दीप जलाएंगे। सूर्यास्त के क्षण में श्रद्धा और समर्पण का दृश्य घाटों पर चरम पर होगा, जब लाखों व्रती अपनी मनोकामनाओं के साथ भगवान भास्कर की उपासना करेंगे।

सुख, समृद्धि और संतान कल्याण की कामना से जुड़ा संध्या अर्घ्य
छठ पूजा का सायंकालीन अर्घ्य व्रतियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान वे सूर्यदेव और छठी मैया से सुख, समृद्धि और संतान की दीर्घायु की कामना करती हैं। पूरे परिवार के साथ व्रती जल में उतरते हैं, और परंपरागत गीतों जैसे — “कांचा ही बांस के बहंगिया, बहंगिया लेके अइहें छठी मइया घाटे…” — की स्वर लहरियों से वातावरण भक्तिमय हो उठता है।

आस्था से जगमग होंगे घाट और शहर
जैसे ही सूर्य पश्चिम में ढलेगा, वैसे ही घाटों पर दीपमालाएं जगमगाने लगेंगी। महिलाएं पूजा अर्चना के बाद घर लौटकर ‘खरना’ का प्रसाद परिवारजनों और आस-पड़ोस में बांटेंगी। शहर की फिजा ‘छठी मैया के जयकारों’ से गुंजेगी और यह लोक आस्था का पर्व सूर्य उपासना की उस परंपरा को पुनः जीवंत करेगा, जो हजारों वर्षों से भारतीय संस्कृति का हिस्सा रही है।

छठ महापर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सूर्य, जल और प्रकृति के प्रति मानव का आभार प्रकट करने का पावन अवसर है। आज शाम का यह क्षण न केवल श्रद्धा का प्रतीक होगा, बल्कि जीवन में उजाला और संतुलन का संदेश भी देगा।

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