बांग्लादेश में तीस्ता मास्टर प्लान लागू करने की मांग को लेकर हंगामा; जानिए क्यों चीन समर्थित यह योजना भारत के लिए खतरनाक संकेत दे रही है

तीस्ता मास्टर प्लान: बांग्लादेश में जल न्याय की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन, भारत-बांग्लादेश जल विवाद फिर गर्मा सकता है
विशेष रिपोर्ट:
ढाका ( शिखर दर्शन ) // बांग्लादेश में तीस्ता मास्टर प्लान को लागू करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने जल वितरण में न्याय और राष्ट्रीय हितों की रक्षा की अपील करते हुए सड़कों पर उतरकर ह्यूमन चेन बनाई। 19 अक्टूबर की शाम चटगांव यूनिवर्सिटी के शहीद मीनार के पास सैकड़ों लोगों ने हाथों में मशालें और पोस्टर लेकर नारे लगाए और मीनार तक शांतिपूर्ण मार्च किया।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से तुरंत तीस्ता मास्टर प्लान लागू करने और बांग्लादेश को तीस्ता नदी के पानी में न्यायसंगत हिस्सा देने की मांग की। इससे पहले, 17 अक्टूबर को उत्तरी बांग्लादेश के पांच जिलों में मशाल रैलियां आयोजित की गई थीं, जिनमें हजारों लोग शामिल हुए और उन्होंने भी नदी जल प्रबंधन में न्याय की मांग की।
बांग्लादेश का आरोप है कि सूखे मौसम में भारत तीस्ता का पानी रोक देता है, जिससे खेती और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी की भारी कमी होती है। वहीं, बरसात के मौसम में बाढ़ की समस्या बढ़ जाती है। रंगपुर डिवीजन के छात्रों ने इस प्रदर्शन के दौरान बांग्लादेश की जल नीतियों पर भारत के कथित प्रभाव के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मास्टर प्लान उत्तरी बांग्लादेश में खेती को बढ़ावा दे सकता है, रोजगार पैदा कर सकता है और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है।
तीस्ता नदी सिक्किम से निकलकर पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र (जमुना) नदी में मिलती है। चीन समर्थित इस योजना को लेकर भारत में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘चिकन नेक’ क्षेत्र के करीब है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह इलाका पूर्वोत्तर भारत को बाकी देश से जोड़ने वाला संवेदनशील क्षेत्र है और चीन की भागीदारी भारत की जल सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग पर असर डाल सकती है।
इस साल मार्च में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने चीन से 50 साल के नदी प्रबंधन मास्टर प्लान की मांग की थी। इसके बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और यूनुस के बीच बातचीत में तय हुआ कि चीनी कंपनियां इस प्रोजेक्ट में शामिल होंगी। बांग्लादेश ने परियोजना के पहले चरण के लिए 6,700 करोड़ टका की आर्थिक मदद मांगी है। इस योजना का समर्थन कई राजनीतिक दलों, जैसे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), ने भी किया है।
तीस्ता जल विवाद दशकों से दोनों देशों के बीच जारी है। बांग्लादेश चाहता है कि उसे पर्याप्त पानी मिले, जबकि भारत और विशेषकर पश्चिम बंगाल सरकार सूखे मौसम में पानी की कमी को लेकर सतर्क है। 1990 के दशक से कई दौर की बातचीत होने के बावजूद कोई समझौता नहीं हो पाया है। पश्चिम बंगाल की आपत्तियों के कारण मामला बार-बार अटका है। 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने स्पष्ट किया था कि तीस्ता प्रोजेक्ट को भारत के साथ मिलकर करना चीन से बेहतर रहेगा।



