क्या आत्माएं केवल मानसिक रूप से कमजोर लोगों को करती हैं प्रभावित ? जानिए ज्योतिष के अनुसार इसका ऊर्जा और ग्रहों से जुड़ा वैज्ञानिक रहस्य…
ग्रह, ऊर्जा और मन का संतुलन: ज्योतिष के अनुसार क्यों कुछ लोगों को ही प्रभावित करती हैं नकारात्मक शक्तियां
रायपुर (शिखर दर्शन) //
अक्सर यह कहा जाता है कि आत्माएं या नकारात्मक ऊर्जा केवल मानसिक रूप से कमजोर लोगों को परेशान करती हैं, लेकिन ज्योतिष शास्त्र इस विषय को कहीं अधिक गहराई से देखता है। ज्योतिष आचार्यों के अनुसार, इसका संबंध केवल व्यक्ति की मानसिक स्थिति से नहीं बल्कि उसकी ग्रह दशा और ऊर्जा संतुलन से भी होता है। इसे वे “ऊर्जा विज्ञान” के रूप में देखते हैं, जहां संतुलित मन और मजबूत चंद्र शक्ति किसी भी व्यक्ति को नकारात्मक प्रभावों से बचाए रख सकती है।
चंद्रमा और मानसिक ऊर्जा का गहरा संबंध
ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना गया है। जन्मकुंडली में यदि चंद्रमा कमजोर हो, पाप ग्रहों (शनि, राहु, केतु या मंगल) से पीड़ित हो या राहु-केतु की छाया में आ गया हो, तो व्यक्ति की मानसिक स्थिरता प्रभावित होती है। ऐसे लोग अक्सर भय, भ्रम या असुरक्षा की भावना से ग्रस्त रहते हैं। इसी असंतुलन के कारण बाहरी नकारात्मक ऊर्जा या वातावरण का असर इन पर जल्दी होता है।

आत्मा नहीं, ‘ऊर्जा असंतुलन’ का प्रभाव
आचार्यों का मानना है कि “आत्मा का प्रभाव” वास्तव में ऊर्जा संतुलन का परिणाम है। जब किसी व्यक्ति का आभामंडल (Aura) कमजोर हो जाता है, तो वह आसपास की नकारात्मक तरंगों को आसानी से ग्रहण करने लगता है। इसे आत्मिक प्रभाव नहीं बल्कि ऊर्जा का असंतुलन कहा जा सकता है। ज्योतिष इस स्थिति को ‘ऊर्जा लीकेज’ के रूप में परिभाषित करता है, जिसमें व्यक्ति की आत्मिक शक्ति क्षीण हो जाती है।
ज्योतिषीय उपाय: कैसे बनाएं मानसिक और ऊर्जा संतुलन
विशेषज्ञों के अनुसार, चंद्रमा और गुरु की शक्ति बढ़ाने के लिए नियमित ध्यान, गायत्री मंत्र जाप, पूर्णिमा पर चंद्र दर्शन और सात्त्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है। गुरु ग्रह के प्रभाव को सुदृढ़ करने से व्यक्ति की विवेक शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
इसके साथ ही, योग, प्राणायाम और सकारात्मक सोच मानसिक मजबूती के लिए अत्यंत कारगर माने गए हैं। इससे मन शांत रहता है और व्यक्ति अपने चारों ओर की नकारात्मक ऊर्जा से स्वतः सुरक्षित हो जाता है।
अंततः ज्योतिष कहता है कि आत्मा नहीं, बल्कि संतुलित मन और सकारात्मक ऊर्जा ही व्यक्ति की सबसे बड़ी सुरक्षा है — क्योंकि जहां मन स्थिर है, वहां किसी भी नकारात्मक शक्ति का प्रभाव नहीं टिकता।



