दिल्ली

जूता कांड के बाद CJI गवई का तंज: कहा – “आजकल क्लाइंट जल्दी नाराज हो जाते हैं”, सुनवाई के दौरान जजों ने माइक म्यूट कर की बातचीत

सोशल मीडिया ट्रेंड पर CJI का तंज: बोले – “आजकल क्लाइंट को जल्दी बुरा लग जाता है”
पांच जजों की संविधान पीठ को सौंपा गया न्यायिक अधिकारियों के करियर ठहराव का मामला

नई दिल्ली (शिखर दर्शन) //
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने अदालत के फैसलों के बाद सोशल मीडिया पर चलने वाले ट्रेंड्स पर तंज कसते हुए कहा कि “आजकल क्लाइंट को जल्दी बुरा लग जाता है, मुवक्किल बहुत नाराज हो जाते हैं।” CJI का यह बयान उस वक्त आया जब एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने कुछ क्षणों के लिए कोर्ट रूम का माइक म्यूट कर दिया था।

दरअसल, सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रन को कुछ ऐसी बात कहनी थी जो वे केवल अपने साथी जज यानी CJI गवई से साझा करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने माइक बंद कर अपनी बात कही। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने मुस्कुराते हुए टिप्पणी की, “मेरे भाई को कुछ कहना था, लेकिन हमें नहीं पता कि इसकी रिपोर्टिंग कैसे की जाएगी, इसलिए उन्होंने ये बात सिर्फ मुझसे कही। आजकल सोशल मीडिया पर नहीं पता चलता कि क्या रिपोर्ट हो जाए, हो सकता है आपका क्लाइंट बहुत नाराज हो जाए।”

मुख्य न्यायाधीश गवई की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट परिसर में उन पर एक वकील ने जूता फेंकने की कोशिश की थी। बताया गया कि वह व्यक्ति कोर्ट में हुई एक टिप्पणी से नाराज था।

इसी दौरान अदालत में न्यायिक सेवा में पदोन्नति के सीमित अवसरों और एंट्री-लेवल न्यायिक अधिकारियों के करियर में आने वाले ठहराव से जुड़े मुद्दे पर भी सुनवाई हुई। CJI बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इस विषय को गंभीर मानते हुए इसे पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को भेजने का निर्णय लिया।

यह मामला अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ द्वारा दायर याचिका से संबंधित है, जिसमें निचली अदालतों के न्यायाधीशों की सेवा शर्तें, वेतनमान और करियर प्रगति जैसे मुद्दों पर चिंता जताई गई है। अब संविधान पीठ इस पर व्यापक विचार करेगी कि देशभर में न्यायिक अधिकारियों के करियर में ठहराव और पदोन्नति संबंधी नीतियों में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

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