छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड: दो और सिरप बच्चों के लिए खतरनाक, डायएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा 0.01% से अधिक पाई गई

गुजरात और तमिलनाडु के बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं दो कफ सिरप
भोपाल ( शिखर दर्शन ) // मध्यप्रदेश में छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड के बाद जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। दवाईयों की जांच में सामने आया है कि बच्चों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ कफ सिरप में खतरनाक मात्रा में जहरीला रसायन पाया गया है, जो बच्चों की सेहत के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, दवा दुकानों से लिए गए 19 सैंपलों में से तीन कफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल 0.01 प्रतिशत से अधिक पाया गया। इनमें खासतौर पर गुजरात में बनने वाले री लाइफ और Respifresh-Tr नामक कफ सिरप शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन सिरप का सेवन बच्चों में किडनी फेल और ब्रेन डैमेज का खतरा पैदा कर सकता है।
जहरीली कफ सिरप बनाने वाली श्री सन कंपनी के डायरेक्टर फिलहाल फरार हैं। जांच में सामने आया कि कंपनी को 2009 में कानूनन बंद कर दिया गया था, लेकिन इसके बाद नाम बदलकर इसे दोबारा चालू कर दिया गया। यह कंपनी तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित एक छोटी फैक्ट्री में सभी मानकों की अनदेखी करते हुए उत्पादन कर रही थी।
फैक्ट्री का क्षेत्रफल केवल 2000 वर्ग फीट का है, लेकिन यहां 60 से अधिक दवाओं का निर्माण किया जाता है। जानलेवा कफ सिरप के उत्पादन में इस्तेमाल कई उपकरण जंग लगे हुए हैं, जो सुरक्षा मानकों की अनदेखी की पुष्टि करते हैं।
सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करने की बात कही है, ताकि बच्चों को इस जानलेवा कफ सिरप से सुरक्षा मिल सके।



