रायपुर संभाग

रायपुर रेलवे स्टेशन पर कुलियों का हंगामा: बैटरी वाहन सेवा के विरोध में लामबंद हुए मजदूर, बोले—’हमारी आजीविका पर संकट मंडरा रहा है’

क्रांति सेना और जोहार पार्टी उतरी समर्थन में

रायपुर (शिखर दर्शन) // रायपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए शुरू की जा रही बैटरी चलित वाहन सेवा के फैसले के खिलाफ कुलियों का विरोध लगातार तेज हो गया है। सोमवार को बड़ी संख्या में कुली प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर जुटे और रेलवे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। रेलवे लाइसेंसी पोर्टर्स मजदूर सहकारी संस्था मर्यादित के बैनर तले कुलियों ने प्रदर्शन करते हुए न्याय की मांग की और कहा कि यह फैसला उनकी आजीविका पर सीधा हमला है।

कुलियों का कहना है कि रेलवे के आधुनिकीकरण और निजीकरण के कारण उनके रोजगार पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। महंगाई के दौर में सीमित आमदनी से परिवार का पालन-पोषण करना कठिन हो गया है। उन्होंने बताया कि रेलवे ने कुलियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए कई प्रावधान किए थे—जैसे बच्चों के लिए रेलवे विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा, परिवार के लिए नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा, हर साल चार वर्दी और आधुनिक विश्रामालय—लेकिन इनमें से कोई भी सुविधा अभी तक जमीनी स्तर पर लागू नहीं हुई।

कुलियों का आरोप है कि रायपुर मंडल में पहले से ही मुफ्त बैटरी वाहन सेवा मौजूद है, इसके बावजूद सामान ढोने का ठेका एक निजी कंपनी को दे दिया गया है। यह कंपनी प्रति यात्री 50 रुपये और प्रति लगेज 30 रुपये वसूल करेगी। कुलियों का कहना है कि यह निर्णय न केवल अनुचित है, बल्कि उनकी रोजी-रोटी छीनने वाला कदम है।

रेलवे लाइसेंसी पोर्टर्स मजदूर सहकारी संस्था मर्यादित, रायपुर ने 22 सितंबर को मंडल रेल प्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर निविदा रद्द करने और उनके हितों की रक्षा की मांग की थी। उन्हें आश्वासन तो मिला, लेकिन कुछ घंटों बाद बताया गया कि निविदा निरस्त होने की संभावना खत्म हो गई है। अब कुलियों ने चेतावनी दी है कि यदि ठेका रद्द नहीं किया गया तो वे बड़े आंदोलन की राह अपनाएंगे।

उन्होंने मांग की है कि या तो निविदा को निरस्त किया जाए या फिर 2003 की तरह कुलियों को रेलवे सेवा में समायोजित करने की व्यवस्था की जाए।

इधर, कुलियों के समर्थन में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी भी मैदान में उतर आई हैं। कुलियों ने बताया कि वे इन संगठनों के साथ मिलकर आगे की लड़ाई लड़ेंगे। आने वाले दिनों में वे ज्ञापन सौंपने, प्रेस वार्ता करने और शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन की रणनीति अपनाने जा रहे हैं।

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