छिंदवाड़ा में 11 मासूमों की मौत का मामला: शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रवीण सोनी गिरफ्तार, जहरीले सिरप से मौत पर बड़ा एक्शन

छिंदवाड़ा (शिखर दर्शन) // छिंदवाड़ा जिले के परासिया विकासखंड में किडनी इंफेक्शन से 11 बच्चों की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने परासिया सिविल अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रवीण सोनी को गिरफ्तार किया है। उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है, जिसमें 10 साल तक की सजा का प्रावधान है।
जानकारी के अनुसार, डॉक्टर सोनी 15 दिन के अवकाश पर रहते हुए अपने निजी क्लीनिक में बच्चों का इलाज कर रहे थे। जिन 11 में से 7 बच्चों की मौत हुई, उनका इलाज डॉक्टर सोनी के क्लीनिक में हुआ था। इलाज के दौरान बच्चों को ‘कोल्डरिफ’ और ‘नेस्ट्रो डीएस’ सिरप दी गई थी। डॉक्टर की पत्नी उनके क्लीनिक के पास ‘अपना मेडिकल’ नाम से मेडिकल स्टोर चलाती हैं, जहां से ये दवाइयां बेची गईं।
सिरप में मिला 48.6% जहरीला रसायन
तमिलनाडु की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जिन सिरपों से बच्चों की मौत हुई, उनमें 48.6 प्रतिशत जहरीला डाइएथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया। यह वही रसायन है जो कई देशों में बच्चों की मौत का कारण बन चुका है।
डॉक्टर बोले — “मैं जिम्मेदार नहीं, जांच रिपोर्ट बताएगी सच”
डॉ. प्रवीण सोनी ने कहा कि वे करीब 40 साल से प्रैक्टिस कर रहे हैं और 15 साल से यही दवाइयां लिखते आ रहे हैं। उन्होंने कहा — “अगर दवाइयों में मिलावट है, तो उसकी जिम्मेदारी मेरी नहीं है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।”
दवा सप्लाई करने वाली कंपनी पर छापा
छिंदवाड़ा ड्रग इंस्पेक्टर गौरव शर्मा ने बताया कि दोनों सिरप के स्टॉक को बैन कर दिया गया है। ये दवाइयां जबलपुर की कटारिया फार्मा से छिंदवाड़ा की तीन दवा दुकानों को सप्लाई की गई थीं। ‘कोल्डरिफ’ सिरप की 660 बोतलों में से 594 बोतलें जब्त की जा चुकी हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि — “कफ सिरप को लेकर केंद्र ने एडवाइजरी जारी की थी, लेकिन प्रदेश सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया। ऐसी स्थिति में 72 घंटे के भीतर रिपोर्ट आनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने 6 दिन का समय लिया।” उन्होंने इस मामले में न्यायिक जांच की मांग की है और कहा कि “राज्य में नशे और जहरीली दवाइयों का व्यापार दोनों चल रहा है, सरकार को जल्द निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए।”
सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर भी सवाल
मामले ने प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग तेज हो गई है, जबकि परिजनों का दर्द और आक्रोश अभी भी थमा नहीं है।



