गांधी जयंती विशेष: छत्तीसगढ़ में दो बार आए थे महात्मा गांधी, जानिए बापू से जुड़ी महत्वपूर्ण यादें

गांधी जयंती पर याद किए गए बापू के छत्तीसगढ़ दौरे, सत्याग्रह और दलित सशक्तिकरण के अद्भुत उदाहरण

रायपुर (शिखर दर्शन) // आज पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती मना रहा है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ से जुड़े गांधीजी के उल्लेखनीय दौरे और उनके समाज सुधारक प्रयासों को याद किया गया।
इतिहासकारों के अनुसार, महात्मा गांधी स्वतंत्रता संग्राम के दौरान दो बार छत्तीसगढ़ आए। पहली बार यह आगमन आज से 105 साल पहले हुआ। 20 दिसंबर 1920 को कलकत्ता से ट्रेन द्वारा गांधीजी रायपुर पहुंचे। उनका स्वागत रायपुर रेलवे स्टेशन पर पं. रविशंकर शुक्ल, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, सखाराम दुबे और पं. वामनराव लाखे ने जोरदार ढंग से किया।

गांधीजी ने रायपुर के वर्तमान गांधी चौक में आयोजित विशाल सार्वजनिक सभा को संबोधित किया। इसके बाद ब्राह्मणपारा स्थित आनंद समाज वाचनालय में महिलाओं की सभा को संबोधित किया गया, जिसमें महिलाओं ने तिलक स्वराज फंड के लिए लगभग 2000 रुपए मूल्य के गहने दान किए।
इसके बाद गांधीजी 21 दिसंबर को धमतरी जिले के कंडेल और कुरुद ग्राम गए और कंडेल सत्याग्रह में शामिल हुए। इसके बाद वह रायपुर लौटे और नागपुर में 26 दिसंबर 1920 को आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में शामिल हुए।

गांधीजी का दूसरा छत्तीसगढ़ दौरा 1933 में बलौदाबाजार में हुआ। यहां उन्होंने मंडी प्रांगण में सभा को संबोधित किया और एक दलित से पानी निकलवाकर उसके हाथों से स्वयं पानी पिया, जो उनके दलितों के प्रति सम्मान और सशक्तिकरण की भावना का प्रतीक माना जाता है।
इसके अलावा, गांधीजी बलौदाबाजार के जगन्नाथ मंदिर (जिसे अब गोपाल मंदिर भी कहा जाता है) गए और वहां दलितों को मंदिर में प्रवेश कराया। उन्होंने मंदिर में भगवान को रेशमी वस्त्र के बजाय खादी का वस्त्र पहनाने की सलाह दी और उनके लिए खादी का वस्त्र मंगवाया। इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रघुनाथ प्रसाद केसरवानी, मनोहर दास वैष्णव, पंडित लक्ष्मी प्रसाद तिवारी और रामकुमार पांडेय भी मौजूद थे।
गांधीजी के ये कदम न केवल स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भागीदारी को दर्शाते हैं, बल्कि समाज में समानता और न्याय की उनकी सोच का भी जीता जागता उदाहरण हैं। आज गांधी जयंती के दिन उनके इन योगदानों को याद कर उन्हें नमन किया गया।



