देर रात 901 कलशों का विसर्जन, नवरात्र पर रेल ट्रैक पर रुकीं ट्रेनें, रियासत काल से निभाई जा रही अनोखी परंपरा

डोंगरगढ़ (शिखर दर्शन) // शारदीय नवरात्र के समापन पर मां बम्लेश्वरी मंदिर से देर रात एक भव्य शोभायात्रा निकली। इस शोभायात्रा में महिलाएं सिर पर ज्योति कलश उठाए मां की जयकारों के साथ आगे बढ़ीं। कुल 901 प्रज्वलित कलशों का महावीर तालाब में विसर्जन किया गया। हजारों श्रद्धालु इस अनूठे दृश्य को देखने के लिए डोंगरगढ़ पहुंचे और तालाब किनारे आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।
डोंगरगढ़ की यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था, बल्कि ऐतिहासिक धरोहर के रूप में भी मानी जाती है। विसर्जन यात्रा मंदिर से प्रारंभ होकर छिन्नमस्तिका मंदिर होते हुए रेलवे ट्रैक पार कर मां शीतला मंदिर तक पहुंची। यहां मां शीतला और मां बम्लेश्वरी के माई ज्योत का मिलन करवा कर पूरे अनुष्ठान को और विशेष बनाया गया।

सबसे अनोखी परंपरा यह है कि यात्रा का मार्ग मुंबई–हावड़ा मुख्य रेलवे लाइन से होकर गुजरता है। इस दौरान भारतीय रेलवे द्वारा रेल यातायात पूरी तरह रोक दिया जाता है। लगभग तीन से चार घंटे तक इस व्यस्त रेलखंड पर मेगा ब्लॉक रहता है।
इस परंपरा की नींव रियासत काल में रखी गई थी। खैरागढ़ के तत्कालीन शासक राजा लाल उमराव सिंह ने 21 अगस्त 1883 को ब्रिटिश सरकार और बंगाल-नागपुर रेलवे के साथ एक समझौता किया था। इस समझौते में नवरात्र के समय रेल पटरियों पर ब्लॉक देने की शर्त भी शामिल थी, ताकि विसर्जन यात्रा निर्बाध रूप से पूरी हो सके।

आज भी यह परंपरा जीवित है और डोंगरगढ़ की नवरात्रि का यह विसर्जन धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि इतिहास, परंपरा और आस्था का अनूठा संगम है, जिसने देशभर के श्रद्धालुओं को दशकों से अपनी ओर आकर्षित किया है।



