अष्टमी पर महाकाल का दिव्य श्रृंगार और भस्म आरती, जयकारों से गुंजा मंदिर

उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // आश्विन माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर मंगलवार तड़के मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर मे स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के कपाट प्रातः 4 बजे खोले गए। अलसुबह की पावन बेला में जब गर्भगृह के पट खुले तो पूरा वातावरण भक्ति, आध्यात्म और उल्लास से भर गया। विश्वप्रसिद्ध भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई, जिसमें बाबा महाकाल का अद्भुत रूप देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया और दूध, दही, घी, शहद व फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न किया। इसके बाद हरिओम का जल अर्पण, प्रथम घंटाल और कपूर आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग पर भस्म अर्पित की गई। भगवान श्री महाकाल को रजत शेषनाग का मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पों की सुगंधित मालाओं से श्रृंगारित करके अवन्तिका नगरी की सुप्रसिद्ध मिठाइयों का भोग लगाया गया। भस्म और श्रृंगार के इस अलौकिक दृश्य ने भक्तों को मोहित कर दिया।
सुबह की इस भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। किसी ने नंदी महाराज के कान में मनोकामना कही, तो कोई बाबा महाकाल के दरबार में हाथ जोड़कर भावविह्वल हो गया। मंदिर प्रांगण “जय जय श्री महाकाल,” “हर हर महादेव,” “हर हर शंभू,” और “ॐ नमः शिवाय” के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। भक्ति और आस्था से ओतप्रोत इस पावन क्षण ने श्रद्धालुओं को अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया।



