रायपुर संभाग

पीएससी घोटाला: सीबीआई ने दाखिल किया 2000 पन्नों का पूरक चालान, पूर्व चेयरमैन सोनवानी को बताया मास्टरमाइंड

रायपुर (शिखर दर्शन) // छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (PSC) भर्ती घोटाले की जांच में सीबीआई ने बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने विशेष अदालत में लगभग 2000 पन्नों का पहला पूरक चालान दाखिल किया है। इसमें पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी को पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड बताया गया है।

सीबीआई ने अपने चालान में कहा है कि सोनवानी ने पद का दुरुपयोग करते हुए न केवल परीक्षा प्रक्रिया में धांधली की, बल्कि अपने परिवार के सदस्यों और प्रभावशाली लोगों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से भ्रष्टाचार को अंजाम दिया।


चालान में किन-किन नामों का खुलासा?

सीबीआई की जांच में अब तक दर्जनभर से अधिक लोगों की संलिप्तता सामने आई है। इनमें पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, सोनवानी के बेटे-बहू समेत पारिवारिक सदस्य, श्री बजरंग पॉवर के पूर्व डायरेक्टर एस.के. गोयल, उनके पुत्र शशांक गोयल, बहू भूमिका गोयल, ललित गणवीर, दीपा आडिल और निशा कोसले जैसे नाम शामिल हैं।

जांच एजेंसी ने बताया कि प्रश्नपत्रों की हेराफेरी से लेकर फर्जी मेरिट सूची तैयार करने तक कई स्तरों पर भ्रष्टाचार किया गया। पूरक चालान दाखिल होने के बाद अब मामले की सुनवाई की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।


हाल ही में हुई गिरफ्तारियां

सीबीआई ने हाल ही में पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, पूर्व सचिव और रिटायर्ड आईएएस जीवनलाल ध्रुव व उनके बेटे सुमित ध्रुव, साथ ही निशा कोसले और दीपा आदिल को गिरफ्तार किया।

  • 18 नवंबर को तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और बजरंग पावर एंड इस्पात के तत्कालीन निदेशक श्रवण कुमार गोयल को हिरासत में लिया गया था।
  • 10 जनवरी को पांच और आरोपियों को पकड़ा गया, जिनमें नितेश सोनवानी (भतीजा, डिप्टी कलेक्टर चयनित) और ललित गणवीर (तत्कालीन डिप्टी परीक्षा नियंत्रक) शामिल थे।
  • 12 जनवरी को शशांक गोयल और भूमिका कटियार (दोनों डिप्टी कलेक्टर चयनित) तथा साहिल सोनवानी (डीएसपी चयनित) को गिरफ्तार किया गया।

वर्तमान में सभी आरोपी जेल में बंद हैं।


क्या है सीजीपीएससी घोटाला?

यह घोटाला छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती प्रक्रिया में 2020 से 2022 के बीच हुई अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि इस दौरान योग्य उम्मीदवारों की अनदेखी कर, प्रभावशाली राजनेताओं और अधिकारियों के करीबियों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य उच्च पदों पर चयनित किया गया।

यह मामला सामने आने के बाद प्रदेश की भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे। छत्तीसगढ़ सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंपी। एजेंसी ने छापेमार कार्रवाई में कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए और अब तक कई बड़े अधिकारियों व प्रभावशाली लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। वर्तमान में मामला न्यायालय में विचाराधीन है।


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