प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल पर अवमानना की कार्यवाही की मांग, सुप्रीम कोर्ट के दो वकीलों ने अटॉर्नी जनरल को लिखा पत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य संजीव सान्याल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट के दो वकीलों ने उनके खिलाफ अवमानना याचिका दायर करने की अनुमति भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से मांगी है। वकीलों का आरोप है कि सान्याल ने न्यायपालिका को भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की राह में “सबसे बड़ी बाधा” बताया है, जो न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता पर हमला है।
वकीलों का आरोप
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के पूर्व सचिव अधिवक्ता रोहित पांडे और अधिवक्ता उज्ज्वल गौड़ ने यह मांग की है। उन्होंने कहा कि न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 15 के तहत, किसी भी निजी व्यक्ति को अदालत की अवमानना कार्यवाही शुरू करने से पहले अटॉर्नी जनरल की अनुमति लेनी होती है।
वकीलों का कहना है कि सान्याल को उनकी टिप्पणी के लिए फटकार लगाई जानी चाहिए, क्योंकि उन्होंने न्यायपालिका और कानूनी व्यवस्था को भारत की प्रगति में रोड़ा करार दिया।
सान्याल ने क्या कहा था?
20 सितंबर को “न्याय निर्माण 2025 सम्मेलन” में सान्याल ने कहा था कि भारत के पास विकसित राष्ट्र बनने के लिए अगले 20–25 साल का समय है, लेकिन “न्यायिक प्रणाली और कानूनी पारिस्थितिकी तंत्र अब सबसे बड़ी बाधा बन गए हैं।”
उन्होंने न्यायपालिका की धीमी प्रक्रिया, अनुबंधों के क्रियान्वयन में देरी और विवाद समाधान में लंबा समय लगने जैसी समस्याओं को रेखांकित किया था।
न्यायपालिका पर अन्य टिप्पणियां
वकीलों द्वारा अटॉर्नी जनरल को भेजे पत्र में सान्याल की अन्य टिप्पणियों का भी उल्लेख किया गया है।
- उन्होंने न्यायपालिका की छुट्टियों की तुलना डॉक्टरों के अस्पताल बंद करने से की और इसे अस्वीकार्य बताया।
- कानूनी पेशे को “स्तरीकरण वाली मध्ययुगीन जाति व्यवस्था” जैसा बताया।
- वरिष्ठ अधिवक्ता प्रणाली और अदालत में बहस के लिए कानून की डिग्री की आवश्यकता पर सवाल उठाए।
वकीलों की दलील
वकीलों का कहना है कि लोकतंत्र में कानूनी प्रक्रियाओं पर आलोचना स्वीकार्य और आवश्यक है, लेकिन सान्याल की टिप्पणियां न्यायपालिका को “राष्ट्रीय प्रगति की सबसे बड़ी बाधा” बताकर पूरी न्यायिक व्यवस्था पर हमला करती हैं। इससे जनता का विश्वास कमजोर होता है और यह न्यायपालिका की अवमानना के दायरे में आता है।



