पाकिस्तान के मदरसों में बच्चों के साथ यौन शोषण और दुर्व्यवहार, संसदीय समिति की रिपोर्ट में भयावह खुलासा; तुरंत सख्त कार्रवाई की मांग

इस्लामाबाद // पाकिस्तान की संसदीय समिति ने हाल ही में देश के मदरसों और विद्यालयों में बच्चों के साथ बढ़ते यौन शोषण, शारीरिक दंड और दुर्व्यवहार की गंभीर घटनाओं पर चिंता जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मदरसों में छोटे बच्चों और बच्चियों तक को सुरक्षित नहीं माना जा सकता, और उन्हें मदरसा जाने में डर का सामना करना पड़ रहा है।
सीनेटर समीना मुमताज जेहरी ने बैठक में जोर देकर कहा कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना देश की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये कदम किसी वैध धार्मिक संस्था को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही बढ़ाकर बच्चों के खिलाफ दुर्व्यवहार रोकने के लिए उठाए जा रहे हैं।
मुख्य सिफारिशें:
- मदरसों का उचित पंजीकरण और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
- नियमित निरीक्षण और निगरानी प्रणाली लागू करना।
- शारीरिक दंड पर पूर्ण प्रतिबंध।
- शिक्षकों को बाल संरक्षण और सुरक्षा पर प्रशिक्षण देना।
- अभिभावक-शिक्षक सहभागिता को अनिवार्य बनाना।
सीनेटर जेहरी ने यह भी रेखांकित किया कि अभियोजन में कमी और यौन शोषण के मामलों में दोषसिद्धि की अत्यंत कम दर चिंता का विषय है।
संसदीय समिति ने सरकार से तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। समिति के अनुसार, शिक्षा के नाम पर किसी भी बच्चे को पीड़ा सहन नहीं करनी चाहिए। यह मुद्दा ‘डॉन’ अख़बार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सीनेट की मानवाधिकार कार्यात्मक समिति की बैठक में उठाया गया, जिसकी अध्यक्षता सीनेटर जेहरी ने की। बैठक में पंजाब, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा के मदरसों में हो रही गंभीर गड़बड़ियों की समीक्षा की गई।
सीनेटर ऐमल वली खान ने कहा कि कई मदरसे अब शिक्षा देने के बजाय राजस्व अर्जित करने के प्लेटफ़ॉर्म बन चुके हैं। उन्होंने मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली में शामिल करने, सख्त कानून बनाने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और जिला स्तर पर निगरानी तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। अन्य सदस्यों ने प्रांतीय स्तर पर एकरूप कानून बनाने और बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी तंत्र लागू करने की सिफारिश की।



