प्रख्यात इतिहासकार गजानन भास्कर मेहेंदले का निधन, मराठा इतिहास जगत में शोक , शिवाजी महाराज पर पांच दशकों तक किया गहन शोध

पुणे ( शिखर दर्शन ) // प्रख्यात इतिहासकार और लेखक गजानन भास्कर (जी.बी.) मेहेंदले का 17 सितंबर की शाम पुणे में निधन हो गया। वे 77 वर्ष के थे और हृदयाघात के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली। मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज पर गहन शोध और लेखन के लिए वे विख्यात थे।
पांच दशकों तक किया मराठा इतिहास का शोध
गजानन भास्कर मेहेंदले ने अपने जीवन के पांच दशकों से अधिक समय छत्रपति शिवाजी महाराज और मराठा इतिहास के गहन अध्ययन में बिताया। वे इस विषय पर सबसे भरोसेमंद विशेषज्ञों में गिने जाते थे। मेहेंदले ने ऐतिहासिक दस्तावेजों, पत्रों और अभिलेखों का गहराई से अध्ययन कर प्रमाणिक शोध प्रस्तुत किए।
योगदान और प्रमुख कृतियाँ
मेहेंदले ने “शिवचरित्र” (मराठी), “Shivaji: His Life and Times”, “Tipu as He Really Was” और “Maratha Navy” जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं। उनके शोध ने मराठा नौसेना, शिवाजी महाराज के युद्ध अभियानों और तत्कालीन प्रशासन के कई पहलुओं को उजागर किया। वे भारत इतिहास संशोधक मंडल और भांडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े रहे।
शिक्षा और कार्यशैली
1947 में जन्मे मेहेंदले ने पुणे विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में स्नातकोत्तर किया। वे फारसी, अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन भाषाओं के ज्ञाता थे और मराठी की प्राचीन मोदी लिपि को भी पढ़ने और समझने में पारंगत थे। मेहेंदले अविवाहित रहे और उन्होंने अपना जीवन ऐतिहासिक शोध, दस्तावेजों के अध्ययन और व्याख्यानों को समर्पित किया। हाल के वर्षों में वे इस्लाम और औरंगज़ेब पर भी शोधरत थे।
इतिहास जगत में शोक की लहर
गजानन भास्कर मेहेंदले के निधन से इतिहास और साहित्य जगत में शोक की लहर है। समकालीन इतिहासकारों और शोध संस्थानों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को अद्वितीय बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी अनुपस्थिति से मराठा इतिहास और भारतीय ऐतिहासिक शोध में अपूरणीय कमी महसूस होगी।



