राहुल गांधी ‘हाइड्रोजन बम’ खुलासे की घोषणा — प्रेस कॉन्फ्रेंस आज सुबह इंदिरा भवन में

नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) // कांग्रेस के सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज यानी 18 सितंबर 2025 को सुबह 10 बजे नई दिल्ली के इंदिरा भवन सभागार में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़े खुलासे करने वाले हैं। पार्टी महासचिव पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस पीसी का समय और स्थान बताया।
राहुल गांधी ने पिछले कुछ समय से चुनावी आंकड़ों और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को बार-बार उठाया है और इन्हें किसी बड़े ‘खुलासे’ से जोड़कर बताया — जिसका रूप उन्होंने मेटाफोरिकल रूप में ‘हाइड्रोजन बम’ करार दिया था। कांगे्रस सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आज की पीसी में इन्हीं दावों को और मजबूत स्वरूप में पेश करने या नए सबूत दिखाने की उम्मीद की जा रही है।
पृष्ठभूमि — क्या कहा था राहुल ने
हाल के दौर में राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों का हवाला देते हुए कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा हिस्से में कथित हेराफेरी का उदाहरण दिया था और उसे ‘एटम बम’ के समान बताया था; अब वह इससे भी बड़ा खुलासा करने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि ‘वोट चोरी’ हमारे लोकतंत्र के लिए परमाणु-स्तर का खतरा है और इससे देश के नेतृत्व पर भी असर पड़ेगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और माहौल
राहुल के इस संकेत के बाद राजनीतिक दलों में उत्तेजना और कड़ी निगरानी बनी हुई है — सरकार और सत्ताधारी दल ने पहले इन आरोपों को खारिज किया है और विपक्षी हमलों के लिए तैयारी तेज कर दी है। आज की पीसी को लेकर मीडिया, राजनीतिक वर्ग और नागरिक समूहों की नजरें इंदिरा भवन पर टिकी हुई हैं।
क्या आएगा सामने — संभावित विषय
मौजूदा कयासों में ‘वोट चोरी’ से जुड़े नए आंकड़े, किसी-किसी सीटों के चुनावी डेटा का विश्लेषण और दस्तावेज़/चार्ट दिखाए जाने की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस ने पहले भी आंकड़ों के जरिए महादेवपुरा से जुड़े अपने दावे प्रस्तुत किए थे; अब वही स्वरूप विस्तारित रूप में पेश किया जा सकता है।
निष्कर्ष
आज सुबह 10 बजे राहुल गांधी की पीसी से राजनीतिक बयानबाज़ी तेज होने की संभावना है — यदि कांग्रेस कोई ठोस दस्तावेज़ या नया सबूत पेश करती है तो मामला संसद-मंच और चुनावी कानूनों तक पहुँचेगा; न हुए तो यह एक राजनीतिक रणनीति के रूप में सामने रहेगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस पूरी तरह लाइव कवरेज के साथ देखी जाएगी और इसके बाद राजनीतिक गतिशीलता में तेज़ी आ सकती है।



