अन्तर्राष्ट्रीय

डगमगाते सिंहासन: श्रीलंका, बांग्लादेश के बाद अब नेपाल, युवाओं के गुस्से ने कैसे बदल डाली तीन देशों की सत्ता ?

भारत के पड़ोसी देशों में तख्तापलट: श्रीलंका, बांग्लादेश के बाद अब नेपाल भी सत्ता परिवर्तन की चपेट में

नई दिल्ली / काठमांडू ( शिखर दर्शन ) // भारत के पड़ोसी देश नेपाल में हालात बिगड़ते-बिगड़ते तख्तापलट तक जा पहुंचे। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा देने के बाद अज्ञात स्थान की ओर रुख कर लिया है। डिप्टी पीएम समेत 10 से ज्यादा मंत्रियों ने पद छोड़ दिया। बीते दो दिनों से जारी हिंसा में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है। हालात यह हैं कि नेपाल पूरी दुनिया से लगभग कट चुका है। इस संकट के पीछे सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है—जेन-जी (Gen-Z) का गुस्सा

यह कोई पहली बार नहीं है, जब भारत के पड़ोसी देश में सत्ता उलट गई हो। पिछले तीन साल में श्रीलंका, बांग्लादेश और अब नेपाल में जनता ने सत्ताधारी नेताओं को गद्दी से उतार दिया। तीनों ही देशों में युवाओं ने आंदोलनों की अगुआई की और बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और महंगाई के खिलाफ आवाज बुलंद की।


श्रीलंका: महंगाई और नीतियों के खिलाफ जनविस्फोट

अप्रैल 2022 में श्रीलंका में महंगाई और आर्थिक तंगी ने जनता को सड़कों पर ला दिया। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन हुए। सरकार ने स्टेट इमरजेंसी लागू कर दी और सुरक्षाबलों को गोली मारने तक के आदेश दिए। इसके बावजूद आंदोलन थमा नहीं। हालात बेकाबू होते ही जुलाई 2022 में गोटबाया को देश छोड़कर मालदीव भागना पड़ा।


बांग्लादेश: आरक्षण विरोध से सत्ता हिली

5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया। ढाका में एक ही दिन में 100 से ज्यादा मौतें हुईं। देखते ही देखते आंदोलन में लाखों लोग शामिल हो गए और प्रधानमंत्री आवास तक जा पहुंचे। हालात संभालना मुश्किल हुआ तो प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देना पड़ा और वे भारत में शरण लेने मजबूर हो गईं।


नेपाल: सोशल मीडिया बैन और करप्शन पर फूटा गुस्सा

4 सितंबर 2025 को नेपाल सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर बैन लगाया। पहले से बेरोजगारी, मंदी और करप्शन से परेशान युवा और भड़क उठे। 8 सितंबर को जेन-जी के आह्वान पर देशभर में प्रदर्शन हुए। संसद भवन से लेकर राष्ट्रपति भवन और सुप्रीम कोर्ट तक को आग के हवाले कर दिया गया। पुलिस फायरिंग में 19 लोगों की मौत हुई और हालात इतने बिगड़े कि 9 सितंबर को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पद छोड़ना पड़ा।


तीनों देशों में एक जैसा पैटर्न

  • सत्ता के खिलाफ युवाओं का नेतृत्व
  • महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार मुख्य कारण
  • पुलिस-आर्मी की सख्ती के बावजूद आंदोलन थमा नहीं
  • सत्ता प्रमुखों को देश छोड़कर भागना पड़ा

निष्कर्ष

दक्षिण एशिया में बीते तीन सालों ने यह साबित कर दिया है कि युवा अब खामोश दर्शक नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत हैं। श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल तीनों देशों में जनता ने यह साफ कर दिया कि अगर सरकारें जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरेंगी, तो कुर्सी ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाएगी।


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