‘तमिलनाडु के मोदी’ सीपी राधाकृष्णन बने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति, जानिए उनके राजनीतिक सफर और उपलब्धियां

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // देश को नया उपराष्ट्रपति मिल गया है। एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने विपक्षी INDIA गठबंधन के प्रत्याशी सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों से हराकर जीत दर्ज की। राधाकृष्णन को कुल 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी को 300 वोट ही हासिल हुए। इस जीत के साथ राधाकृष्णन भारत के 15वें उपराष्ट्रपति बन गए हैं।
21 जुलाई को तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने खराब सेहत के चलते पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद भाजपा की संसदीय बोर्ड बैठक में महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार घोषित किया गया। उनकी लोकप्रियता और लंबे राजनीतिक अनुभव को देखते हुए उन्हें ‘तमिलनाडु का मोदी’ भी कहा जाता है।
कौन हैं सीपी राधाकृष्णन?
सीपी राधाकृष्णन का पूरा नाम चन्द्रपुरम पोनुस्वामी राधाकृष्णन है। उनका जन्म 20 अक्टूबर 1957 को तिरुप्पुर (तमिलनाडु) में हुआ। उनके पिता का नाम सीके पोन्नुसामी और माता का नाम जानकी अम्मल है। वे बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक हैं और पढ़ाई वीओ चिदंबरम कॉलेज, तूतीकोरिन से की है।
राजनीतिक सफर और अनुभव
राधाकृष्णन का राजनीतिक करियर करीब चार दशकों का है। उन्होंने संघ और भाजपा से सक्रिय राजनीति की शुरुआत की।
- साल 1998 और 1999 में कोयम्बटूर से लोकसभा सांसद चुने गए।
- साल 2003 से 2006 तक तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष रहे।
- महाराष्ट्र, झारखंड, तेलंगाना और पुदुचेरी में राज्यपाल/उपराज्यपाल के रूप में जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
- जुलाई 2024 तक वे महाराष्ट्र के 24वें राज्यपाल थे।
विशेषताएं और उपाधियां
सीपी राधाकृष्णन दक्षिण भारत के पहले OBC नेता हैं जिन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकित किया गया। उन्हें सभी राजनीतिक दलों में सम्मान प्राप्त है। उनके समर्थक उन्हें ‘तमिलनाडु का मोदी’ कहते हैं। उनकी मां ने भी सर्वपल्ली राधाकृष्णन से प्रेरित होकर उन्हें यह नाम दिया था, उम्मीद करते हुए कि बेटा एक दिन राष्ट्रपति बनेगा।
उपलब्धियां और सामाजिक योगदान
- तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने 19,000 किलोमीटर लंबी रथ यात्रा की।
- इस दौरान उन्होंने नदियों के एकीकरण, आतंकवाद विरोध, समान नागरिक संहिता, अस्पृश्यता खत्म करने और नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान चलाया।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
अपनी राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक उपलब्धियों के बल पर आज वे भारत के उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचे हैं। उनकी जीत न केवल भाजपा और एनडीए के लिए अहम है, बल्कि दक्षिण भारत में भाजपा के बढ़ते प्रभाव की भी बड़ी मिसाल है।



