रायपुर संभाग

तीजा-पोरा पर्व और भूपेश बघेल का जन्मदिन बना शक्ति प्रदर्शन का मंच: बरसात में झूमे कार्यकर्ता, प्रदेशभर से दिग्गज नेता पहुंचे बधाई देने

भूपेश बघेल ने तीजा-पोरा पर्व को बनाया शक्ति प्रदर्शन का मंच, कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने

रायपुर (शिखर दर्शन) // छत्तीसगढ़ का पारंपरिक तीजा-पोरा पर्व इस बार रायपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम में एक भव्य उत्सव का रूप ले लिया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हर साल की तरह इस बार भी विशेष आयोजन किया, जो पारंपरिक त्योहार से आगे बढ़कर राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में तब्दील हो गया।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी लोकगायिका पद्मश्री ममता चंद्राकर, सुनील सोनी, हिरेश सिन्हा, जितेश्वरी सिन्हा और आरू साहू जैसे कलाकारों ने लोकगीतों की शानदार प्रस्तुति दी। पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों ने नृत्य कर माहौल को जीवंत किया। कार्यक्रम स्थल पर झूले, सेल्फी प्वाइंट और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की व्यवस्था ने मेले जैसा वातावरण बना दिया।

तेज बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता पहुंचे। मंच पर कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू, रविंद्र चौबे, शिव डहरिया, अमरजीत भगत और अनिला भेड़िया सहित कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने भूपेश बघेल के नाम और तस्वीर वाले टी-शर्ट पहनकर उत्साह दिखाया। लोकगीतों की धुन पर बघेल खुद समर्थकों के साथ झूमते नजर आए।

पूर्व मंत्री रविंद्र चौबे ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “भूपेश बघेल को डराने और दबाने की भरपूर कोशिश की जा रही है, लेकिन वे न तो डरने वाले हैं और न ही दबने वाले।” नेताओं ने संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की दिशा तय करने वाले असली नेता भूपेश बघेल ही हैं।

“मिल-जुलकर मनाना चाहिए तीजा-पोरा” – बघेल

भूपेश बघेल ने कहा कि यह पर्व बेटियों और बहुओं के मायके लौटने और सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक है। बच्चे मिट्टी के खिलौनों से खेलते हैं और हर कोई इसमें शामिल होता है। उन्होंने कहा, “यह सबका त्यौहार है, इसे मिल-जुलकर मनाना चाहिए। इंद्रदेव भी प्रसन्न हैं, कार्यक्रम शुरू होने के साथ ही बारिश हो रही है, लेकिन लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ।”

बीजेपी का पलटवार

कांग्रेस के आयोजन को लेकर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “कांग्रेस ऐसा दिखा रही है जैसे त्योहारों का आविष्कार उसी ने किया हो। जब कांग्रेस नहीं थी, तब भी हमारे दादा-परदादा ये पर्व मना रहे थे। त्योहार हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं, कांग्रेस इसे अपना बताकर छत्तीसगढ़ की संस्कृति को चुनौती दे रही है।”

👉 इस तरह तीजा-पोरा का पर्व सांस्कृतिक उत्सव के साथ-साथ राजनीतिक बयानबाजी और शक्ति प्रदर्शन का मंच भी बन गया।

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