जन्माष्टमी पर ग्वालियर का गोपाल मंदिर बना आस्था का केंद्र

100 करोड़ के रियासतकालीन गहनों से होता है राधा-कृष्ण का श्रृंगार, 24 घंटे उमड़ती है भक्तों की भीड़
ग्वालियर ( शिखर दर्शन ) // मध्य प्रदेश के ग्वालियर के फूलबाग इलाके में स्थित 104 साल पुराना गोपाल मंदिर जन्माष्टमी पर आस्था और श्रद्धा का बड़ा केंद्र बन जाता है। सिंधिया राजवंश द्वारा बनवाए गए इस मंदिर में भगवान राधा-कृष्ण की अद्भुत प्रतिमाएं स्थापित हैं। आम दिनों में भी यहां भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन जन्माष्टमी का पर्व विशेष होता है क्योंकि इसी दिन राधा-कृष्ण का श्रृंगार रियासतकालीन बेशकीमती गहनों से किया जाता है, जिनकी अनुमानित कीमत 100 करोड़ रुपये से भी अधिक है।
100 करोड़ के जेवरातों से श्रृंगारित होते हैं राधा-कृष्ण
जन्माष्टमी पर भगवान का श्रृंगार हीरे, मोती, पन्ना और अन्य बेशकीमती रत्नों से जड़े स्वर्ण आभूषणों से किया जाता है। इनमें 249 मोतियों की माला, पन्ना और सोने का सात लड़ी का हार, हीरे जड़े कंगन, सोने की नथ, झुमके, कंठी, चूड़ियां, कड़े और राधा-कृष्ण का स्वर्ण मुकुट शामिल हैं। प्रतिमा पर विशालकाय चांदी का छत्र और पूजा के लिए 50 किलो वजनी चांदी के बर्तन भी उपयोग में लाए जाते हैं।
ये सभी गहने सालभर बैंक के लॉकर में सुरक्षित रहते हैं और केवल जन्माष्टमी के दिन विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंदिर लाए जाते हैं। इसके बाद नगर निगम महापौर द्वारा दोपहर 12 बजे भगवान राधा-कृष्ण की महाआरती कर श्रृंगार दर्शन शुरू होते हैं।
रियासतकालीन परंपरा और आस्था का प्रतीक
गोपाल मंदिर की स्थापना 1921 में ग्वालियर रियासत के शासक माधवराव प्रथम ने करवाई थी। स्वतंत्रता से पहले तक भगवान राधा-कृष्ण हमेशा इन गहनों से श्रृंगारित रहते थे, लेकिन 1956 में मध्यप्रदेश राज्य बनने के बाद गहनों को बैंक में जमा कर दिया गया। वर्ष 2007 में शासन की अनुमति के बाद यह परंपरा दोबारा शुरू हुई और तभी से हर साल जन्माष्टमी पर गहनों से श्रृंगार की परंपरा निभाई जा रही है।
मथुरा जैसा माहौल, भक्तों का उमड़ता सैलाब
श्रद्धालु मानते हैं कि जन्माष्टमी के दिन गोपाल मंदिर में दर्शन करने से मन्नतें पूरी होती हैं और मंदिर परिसर में मथुरा जैसी दिव्यता का अनुभव होता है। इसी कारण भक्त इस दिन के लिए सालभर इंतजार करते हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
गहनों की कीमत और भीड़ को देखते हुए जन्माष्टमी पर मंदिर में विशेष सुरक्षा व्यवस्था रहती है। करीब 150 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं और पूरे परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की जाती है। इस सख्त सुरक्षा घेराबंदी के बीच भी आस्था का उत्साह चरम पर रहता है और हजारों की संख्या में भक्त राधा-कृष्ण के सजीले रूप के दर्शन कर मन्नतें मांगते हैं।



