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किश्तवाड़ हादसा: मृतकों की संख्या 60 पहुंची, 21 की पहचान; 100 से अधिक लापता, मलबे में खून से सने शव और फेफड़ों में भरा कीचड़

किश्तवाड़ में बादल फटने से मचा हाहाकार: मौत का आंकड़ा 60 पहुंचा, 100 से अधिक अब भी लापता; मलबे में खून से सने शव और फेफड़ों में भरा कीचड़, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के पड्डर सब-डिवीजन के चशोती गांव में मंगलवार को बादल फटने (Kishtwar Cloudburst) की विनाशकारी घटना ने भारी तबाही मचाई। इस त्रासदी में अब तक मौत का आंकड़ा 60 तक पहुंच गया है, जबकि 100 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। 2 CISF जवानों समेत 21 शवों की पहचान हो चुकी है। हादसे में 167 लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर है।

यह घटना चशोती मचैल माता मंदिर यात्रा के शुरुआती प्वॉइंट पर हुई, जहां उस समय श्रद्धालुओं की बसें, टेंट, लंगर और दुकानें मौजूद थीं। पहाड़ से अचानक आए पानी और मलबे के तेज बहाव ने सबकुछ बहा दिया। चश्मदीदों के मुताबिक, घटना से कुछ ही सेकंड पहले तेज धमाके जैसी आवाज आई और फिर लोग घबराहट में चीखते-भागते नजर आए।

रेस्क्यू ऑपरेशन में सेना, NDRF और पुलिस जुटी
किश्तवाड़ के डिप्टी कमिश्नर पंकज शर्मा के अनुसार, NDRF की टीमें राहत व बचाव कार्य में लगी हैं, जबकि RR, व्हाइट नाइट कोर की मेडिकल टीम, जम्मू-कश्मीर पुलिस, SDRF और अन्य एजेंसियां भी ऑपरेशन में जुटी हैं। 60-60 जवानों वाली पांच सैन्य टुकड़ियां (कुल 300 जवान) मौके पर भेजी गई हैं। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं।

चश्मदीदों ने सुनाया खौफनाक मंजर
हादसे के पीड़ित राकेश शर्मा ने बताया कि पानी और मलबे की चपेट में आने से पहले वे अपने बच्चे के साथ लंगर में थे। अचानक आई तेज धारा और गिरते मलबे में वे दब गए, लेकिन एक बड़ा लकड़ी का टुकड़ा उन पर गिरा जिसने ढाल का काम किया और उनकी जान बच गई। उन्होंने कहा, “अभी भी कम से कम 60-70 लोग मलबे में दबे हो सकते हैं।”

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, मलबे में मिले शवों के फेफड़ों में कीचड़ भरा था, कई शव खून से सने थे, पसलियां टूटी हुई थीं और अंग अलग पड़े थे। घायलों को स्थानीय लोग और सुरक्षाबल अपनी पीठ पर लादकर अस्पताल पहुंचा रहे हैं।

एक महिला पीड़िता ने बताया, “कुछ ही पलों में हर तरफ बस लाशें ही लाशें थीं। कई बच्चों की गर्दन मुड़ गई थी, कई के पैर कट गए थे। बड़े-बड़े पेड़ और पत्थर बहते हुए आए और सबकुछ तबाह कर दिया।”

PM मोदी ने लिया हालात का जायजा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से बात कर स्थिति का जायजा लिया और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।

किश्तवाड़ का चशोती गांव मचैल माता मंदिर के रास्ते पर पहला गांव है और समुद्र तल से 1,818 से 3,888 मीटर की ऊंचाई वाले पहाड़ों के बीच स्थित है। यहां हर साल अगस्त में मचैल माता यात्रा होती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

यह हादसा न केवल धार्मिक यात्रा में आई श्रद्धालुओं की भीड़ को गहरे सदमे में डाल गया है, बल्कि पड्डर घाटी के निवासियों के लिए भी एक भयानक त्रासदी बन गया है। राहत और बचाव कार्य अब भी जारी है, लेकिन मलबे में दबे लोगों की संख्या को देखते हुए मृतकों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है।

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