दिल्ली

लाल किले से पीएम मोदी के ऐलान: ऑपरेशन सिंदूर, मिशन सुदर्शन चक्र, डेमोग्राफी मिशन और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प

नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) // 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए सुरक्षा, विकास, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय गौरव से जुड़े कई अहम मुद्दों पर घोषणाएं कीं। अपने भाषण में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर, मिशन सुदर्शन चक्र और हाई पावर डेमोग्राफी मिशन की शुरुआत का ऐलान किया, सिंधु समझौते पर कड़ा रुख जताया और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को दोहराया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दी बधाई
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने पर बधाई दी। उन्होंने कहा, “सेवा, समर्पण, संगठन और अप्रतिम अनुशासन—ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पहचान है। यह दुनिया का एक तरह से सबसे बड़ा NGO है, जिसने व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण तक की यात्रा में अपना जीवन समर्पित किया है।”

आपदा पीड़ितों के प्रति संवेदनाएं
प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि आजादी का महापर्व सामूहिक सिद्धियों का महापर्व है, लेकिन प्रकृति हमारी परीक्षा ले रही है। केंद्र और राज्य सरकारें राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हैं।

ऑपरेशन सिंदूर से दुश्मन को करारा जवाब
पीएम मोदी ने कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पूरे देश में आक्रोश था। “ऑपरेशन सिंदूर उसी आक्रोश की अभिव्यक्ति है। हमने सेना को खुली छूट दी और हमारे सैनिकों ने ऐसा कर दिखाया जिसे दशकों तक भुलाया नहीं जा सकेगा। अब भारत परमाणु धमकियों और ब्लैकमेल को कतई सहन नहीं करेगा।”

सिंधु समझौते पर कड़ा रुख
प्रधानमंत्री ने कहा कि सिंधु जल समझौते ने दशकों से भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचाया है। “हिंदुस्तान के हक का पानी सिर्फ और सिर्फ हिंदुस्तान और हमारे किसानों का है। अब इस एकतरफा समझौते को स्वीकार नहीं किया जाएगा।”

हाई पावर डेमोग्राफी मिशन की शुरुआत
मोदी ने चेतावनी दी कि देश की जनसांख्यिकी को बदलने की साजिशें हो रही हैं। “घुसपैठिए आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। डेमोग्राफिक परिवर्तन देश की सुरक्षा के लिए खतरा है। इसे रोकने के लिए हमने हाई पावर डेमोग्राफी मिशन की शुरुआत की है।”

आत्मनिर्भर भारत का संकल्प
प्रधानमंत्री ने कहा कि गुलामी ने हमें निर्भर बना दिया और निर्भरता की आदत ने हमारी सामर्थ्य को कमजोर किया। “आत्मनिर्भर होना सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सामर्थ्य और आत्मविश्वास से जुड़ा है। इसे बनाए रखना और बढ़ाना हमारी अनिवार्यता है।”


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