‘संविधान और लोकतंत्र सर्वोपरि’ : स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करतीं राष्ट्रपति मुर्मु

संविधान और लोकतंत्र हमारे लिए सर्वोपरि : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) // 79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि हमारे लिए संविधान और लोकतंत्र सबसे सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त की तारीख हमारी सामूहिक स्मृति में गहराई से अंकित है। औपनिवेशिक शासन की लंबी अवधि के दौरान देशवासियों की अनेक पीढ़ियों ने स्वतंत्र भारत का सपना देखा था और देश के हर हिस्से में लोग विदेशी शासन की बेड़ियों को तोड़ने के लिए व्याकुल थे।
राष्ट्रपति ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और कई चुनौतियों के बावजूद यहां लोकतंत्र फल-फूल रहा है। उन्होंने बताया कि निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है, शहरीकरण तेजी से हो रहा है, मेट्रो रेल परियोजनाओं और हाईवे निर्माण का विस्तार हो रहा है, और जल जीवन मिशन के तहत देश के सभी गांवों में पेयजल पहुंचाया जा रहा है।
संविधान की महत्ता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “हमारे द्वारा अपनाए गए संविधान की आधारशिला पर लोकतंत्र का भवन निर्मित हुआ है। हमने ऐसी संस्थाओं का निर्माण किया, जिससे लोकतांत्रिक कार्यशैली को मजबूती मिली।” उन्होंने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें देश के विभाजन से हुई पीड़ा को कभी नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि यह दिवस हमें भारतीय होने के गौरव की याद दिलाता है।
अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन हमें गर्व से भर देता है और हमें एक गौरवान्वित भारतीय होने की विशेष अनुभूति कराता है।



