भारत के बंटवारे के चार बड़े चेहरे: मौत से जुड़ी अनकही कहानियां

15 अगस्त 2025 को भारत अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। आज़ादी का यह पर्व हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है, लेकिन इसके साथ ही यह इतिहास के उस दर्दनाक अध्याय की याद भी दिलाता है, जब 14 अगस्त 1947 की रात भारत के दो टुकड़े कर पाकिस्तान का जन्म हुआ था। इस विभाजन के पीछे कई लोगों की भूमिका थी, जिनमें मोहम्मद अली जिन्ना, रहमत अली, लियाकत अली खान और लॉर्ड माउंटबेटन जैसे नाम प्रमुख रहे। इन चारों ने अलग-अलग तरीकों से बंटवारे की प्रक्रिया को गति दी, लेकिन उनकी मौतें भी उतनी ही चर्चित और रहस्यमय रहीं।

पाकिस्तान के विचार से नाखुश रहमत अली
1940 में मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान के गठन का प्रस्ताव रखा, जिसके बाद सर सिरिल रेडक्लिफ ने विभाजन की रेखा खींची। रहमत अली, जिन्हें पाकिस्तान नाम देने का श्रेय जाता है, आज़ादी के बाद पाकिस्तान आ तो गए, लेकिन मोहम्मद अली जिन्ना की नीतियों से असंतुष्ट थे। उन्होंने जिन्ना को “गद्दार” तक कह डाला, जिसके बाद उन्हें इंग्लैंड लौटने का आदेश मिला। 3 फरवरी 1949 को उनकी मौत हो गई और उन्हें कैम्ब्रिज के न्यू मार्केट रोड कब्रिस्तान में दफनाया गया—यहां तक कि उनकी कब्र के लिए भी चंदा जुटाना पड़ा।

टीबी और उपेक्षा से जिन्ना का अंत
मोहम्मद अली जिन्ना लंबे समय से टीबी से पीड़ित थे। 1948 में उनकी हालत बिगड़ने पर क्वेटा से कराची लाया गया, लेकिन एयरपोर्ट से गवर्नर हाउस ले जाती एंबुलेंस 4 किलोमीटर बाद पेट्रोल खत्म होने से रुक गई। जिन्ना की हालत इतनी नाज़ुक थी कि उनके शरीर पर मक्खियां भिनभिना रही थीं। एक घंटे बाद गवर्नर हाउस पहुंचाया गया, जहां 11 सितंबर 1948 को उनकी मौत हो गई।

हत्या के शिकार हुए लियाकत अली खान
पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान 16 अक्टूबर 1951 को रावलपिंडी में एक सभा को संबोधित कर रहे थे, तभी पठानी सूट और पगड़ी पहने सईद अकबर नामक युवक ने उन्हें गोली मार दी। सईद अकबर अफगानिस्तान का रहने वाला था और घटनास्थल पर ही मारा गया।

ब्लास्ट में मारे गए लॉर्ड माउंटबेटन और परिवार
27 अगस्त 1979 को लॉर्ड माउंटबेटन आयरलैंड के काउंटी स्लिगो में छुट्टियां मना रहे थे। नाव पर उनके साथ बेटी, दामाद, बेटी की सास और जुड़वां पोते मौजूद थे। अचानक नाव में जोरदार विस्फोट हुआ, जिसमें सभी के चिथड़े उड़ गए। माना जाता है कि यह हमला आयरिश रिपब्लिकन आर्मी ने किया था, जो उनके आयरलैंड में किए गए सैन्य अभियानों से नाराज थी।


इस प्रकार, जिन लोगों ने भारत के बंटवारे की पटकथा लिखने में अहम भूमिका निभाई, उनकी मौतें भी इतिहास में अलग तरह से दर्ज हो गईं—कभी बीमारी, कभी हत्या, तो कभी विस्फोट के जरिए।



