मानसिक अस्पताल में व्यवस्थाओं पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, सुधार के लिए प्रशासन को दिए सख्त निर्देश

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ के एकमात्र मानसिक चिकित्सा अस्पताल “सेनदरी” ( रतनपुर रोड ) में डॉक्टरों की अनुपस्थिति, आवश्यक मशीनों की कमी, गंदगी और स्वच्छता की लापरवाही जैसे गंभीर मामलों पर हाईकोर्ट ने कड़ा रूख अपनाया। सुनवाई के दौरान शासन ने बताया कि स्वास्थ्य सचिव ने सोमवार को ही अस्पताल का निरीक्षण किया था। हालांकि, विस्तृत जवाब पेश करने के लिए समय मांगा गया, जिस पर कोर्ट ने एक सप्ताह की मोहलत दी और अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय कर दी।
निरीक्षण में सामने आए तथ्य
- अल्ट्रासाउंड समेत कई जरूरी मशीनें अस्पताल में नहीं हैं, मरीजों को जांच के लिए सिम्स भेजना पड़ता है।
- डॉक्टर और स्टाफ रोजाना केवल 1 से 1.5 घंटे ही उपस्थित रहते हैं, जबकि ड्यूटी समय सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक है।
- रजिस्टर और CCTV फुटेज से साबित हुआ कि कई डॉक्टर देर से आते हैं और बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं करते।
- अस्पताल का वाटर कूलर खराब है और स्वच्छता की स्थिति बेहद खराब पाई गई।
कोर्ट की नाराजगी और निर्देश
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में स्पष्ट कहा था कि केवल शपथपत्र से सुधार संभव नहीं है। इस बार भी कोर्ट ने नाराजगी जताई और निर्देश दिए कि—
- अस्पताल में सभी जांच और इलाज की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएँ।
- डॉक्टरों और स्टाफ की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
शासन का रुख
महाधिवक्ता ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि “सेनदरी” (रतनपुर रोड ) मानसिक अस्पताल के सुधार के लिए शासन गंभीर है। डॉक्टरों की नियुक्ति हेतु विज्ञापन जारी कर दिए गए हैं। कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक अस्पताल का पुनः निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करें।



