रायपुर संभाग

जल जीवन मिशन पर गरमाया सदन: भूपेश बघेल ने उठाया मुद्दा, मंत्री के जवाब से नाराज़ विपक्ष ने किया वॉकआउट

जल जीवन मिशन पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में हंगामा: भूपेश बघेल ने उठाया सवाल, जवाब से असंतुष्ट विपक्ष का वॉकआउट
विपक्ष का आरोप – “डबल इंजन सरकार में सिर्फ आंकड़ेबाजी, नल हैं पर पानी नहीं”

रायपुर (शिखर दर्शन) // छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को जल जीवन मिशन को लेकर जमकर हंगामा हुआ। प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस योजना को विफल बताते हुए सवाल उठाया कि आखिर 2022-23, 2023-24 और 2024-25 में कितनी राशि खर्च हुई और कितने घरों तक वास्तव में पानी पहुंच पाया? उन्होंने आरोप लगाया कि कई जिलों में बेहद कम खर्च हुआ और बहुत से घर अब भी जल सुविधा से वंचित हैं।

इस पर जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री व जल संसाधन मंत्री अरुण साव ने कहा कि अब तक 15,045 करोड़ रुपये यानी 57% राशि खर्च की जा चुकी है और 31.16 लाख घरों में नल से जल आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने कहा कि 3,836 गांवों में पूरी तरह नल से जल की सुविधा चालू है, और राज्य में कुल 49 लाख से अधिक घरों को नल कनेक्शन से जोड़ने का लक्ष्य है।

हालांकि भूपेश बघेल ने सरकार की उपलब्धियों पर सवाल उठाते हुए कहा, “डबल इंजन की सरकार के 2 वर्षों में केवल 10 लाख नए घरों में ही जल पहुंच पाया है। ये भी पता नहीं कि आंकड़े सही हैं या नहीं। कई घरों में सिर्फ नल लगाए गए हैं, पानी पहुंचा ही नहीं।”

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “हमारी सरकार में 74% कार्य हुआ था, जबकि वर्तमान सरकार ने 20 महीनों में मात्र 7% काम किया।” जवाब में मंत्री अरुण साव ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने बिना जल आपूर्ति के केवल नल लगाए, जबकि मौजूदा सरकार ने सत्यापन के बाद 10 लाख घरों में जल पहुंचाया है।

विपक्ष के आरोपों और मंत्री के जवाबों को लेकर सदन में जोरदार नारेबाजी और तीखी बहस हुई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने सभी सदस्यों से कहा कि प्रश्नकाल की गरिमा बनाए रखें और आसंदी की मर्यादा का उल्लंघन न करें। उन्होंने कहा, “पूरे देश की निगाहें छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही पर होती हैं।”

जल जीवन मिशन को लेकर विपक्ष का आरोप था कि योजना के आंकड़े भ्रामक हैं और ज़मीनी सच्चाई कुछ और है। जवाबों से असंतुष्ट होकर कांग्रेस के विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने राज्य स्तरीय उच्चपावर समिति की अनुशंसाओं और फर्जी दस्तावेजों से काम हासिल करने वाली फर्मों पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठाया। मंत्री अरुण साव ने बताया कि 12 अनुबंध रद्द किए गए हैं और मामले की जांच जारी है। जिन पर आरोप प्रमाणित हुए हैं, उनके खिलाफ एफआईआर की गई है तथा अन्य फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया जारी है।

वहीं, कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव और भाजपा विधायक अजय चंद्राकर के बीच तीखी नोकझोंक हुई। यादव ने पूछा कि यदि 70% कार्य से पहले भुगतान नहीं होता, तो फिर कई जगहों पर 80% भुगतान कैसे हुआ? इस पर मंत्री साव ने कहा कि स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि जब तक कार्य 70% पूर्ण नहीं होता, कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गहरा टकराव देखने को मिला। जल जीवन मिशन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर राजनीतिक बयानबाज़ी और आंकड़ों की जंग ने विधानसभा की कार्यवाही को गरमा दिया।

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