5 साल बाद चीन पहुंचे जयशंकर, चीनी विदेश मंत्री से मुलाकात में आतंकवाद पर दिया सख्त संदेश
गलवान हिंसा के बाद पहली बार चीन पहुंचे जयशंकर, बोले – आतंकवाद पर भारत की जीरो टॉलरेंस नीति, चीन से भी यही उम्मीद
तियानजिन में एससीओ सम्मेलन में की दो टूक बात, कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू होने पर जताया आभार
बीजिंग // गलवान घाटी में जून 2020 की हिंसक झड़प के बाद पहली बार चीन पहुंचे भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। यह मुलाकात चीन के तियानजिन शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले हुई। जयशंकर ने इस दौरान चीन को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि भारत आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाता है और चीन से भी इसी तरह की सख्ती की अपेक्षा करता है।
तीन दिवसीय चीन दौरे पर पहुंचे विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन जैसे बड़े पड़ोसी देशों के बीच स्थिर और सकारात्मक संबंध सिर्फ दोनों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए लाभकारी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए और प्रतिस्पर्धा को संघर्ष में बदलने से बचना होगा।
कूटनीतिक रिश्तों में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद
बैठक की शुरुआत में जयशंकर ने 2024 में कजान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि उसके बाद से भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक प्रगति हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मौजूदा यात्रा इस रुख को आगे बढ़ाएगी। जयशंकर ने कहा, “हमारे द्विपक्षीय संबंधों के लिए यह जरूरी है कि हम दूरदृष्टि के साथ आगे बढ़ें और मौजूदा गति को बरकरार रखें।”
कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू, चीन को जताया धन्यवाद
बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि कैलाश मानसरोवर यात्रा पांच वर्षों के अंतराल के बाद फिर से शुरू हो गई है। उन्होंने इस सहयोग के लिए चीन का आभार व्यक्त किया और कहा कि इससे दोनों देशों के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध और मजबूत होंगे।
एससीओ में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख जरूरी
शंघाई सहयोग संगठन की भूमिका पर चर्चा करते हुए जयशंकर ने कहा कि संगठन का मूल उद्देश्य आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ साझा लड़ाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एससीओ मंच पर आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को पूरी मजबूती के साथ लागू किया जाएगा।
वैश्विक परिस्थितियों पर जताई चिंता
जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक स्थिति जटिल है और ऐसे समय में भारत और चीन जैसे प्रमुख देशों के बीच खुला संवाद अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पड़ोसी देशों को एक-दूसरे की संवेदनशीलताओं का सम्मान करते हुए रचनात्मक सहयोग बढ़ाना चाहिए।
दूतावास में अनार का पौधा लगाया
दौरे के दौरान विदेश मंत्री ने बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत अनार का पौधा भी रोपा। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पारिवारिक मूल्यों को सम्मान देने की दिशा में एक सांकेतिक प्रयास है।
भारत-चीन के बीच उच्च स्तरीय संपर्क की अहम कड़ी
गौरतलब है कि यह यात्रा गलवान हिंसा के बाद भारत और चीन के बीच पहली बड़ी द्विपक्षीय उच्च स्तरीय राजनयिक पहल है। हालांकि जयशंकर इससे पहले बहुपक्षीय मंचों पर वांग यी से मिलते रहे हैं, लेकिन सीमा विवाद के संवेदनशील दौर में यह दौरा दोनों देशों के बीच रिश्तों में संतुलन और संवाद का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
