बोरवेल में गिरने से दो बहनों की मौत: घंटों चले रेस्क्यू के बाद मिला दूसरा शव, गांव में छाया मातम
खुले बोरवेल ने ली दो मासूम बहनों की जान: सतना के रेरुआ कला गांव में दर्दनाक हादसा, सात घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन
सतना (शिखर दर्शन) // मध्य प्रदेश के सतना जिले में रविवार शाम एक बेहद दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया। नागौद थाना क्षेत्र के रेरुआ कला गांव में धान की रोपाई के बाद खेत में पैर धोने गई दो किशोरियां पुराने खुले बोरवेल के गड्ढे में डूब गईं, जिससे उनकी मौत हो गई। मृतक बच्चियों की पहचान 16 वर्षीय सोमवती पिता चक्कू और 12 वर्षीय दुर्गा पिता संतोष अहिरवार के रूप में हुई है।
हादसा शाम करीब 5 बजे हुआ। खेत में पानी से भरे एक पुराने बोरवेल के गड्ढे में दोनों बच्चियों का पैर फिसला और वे गहरे पानी में चली गईं। घटनास्थल गजानंद मिश्रा के खेत में था, जहां पहले बोरवेल खोदा गया था, लेकिन पानी नहीं मिलने पर उसे बंद कर दिया गया था। हाल ही में हुई बारिश के कारण गड्ढे की मिट्टी धंस गई और वह फिर से गहरा हो गया, जो इस दर्दनाक हादसे की वजह बना।
स्थानीय लोगों की सूचना पर परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को खबर दी गई। कुछ ही देर में नागौद प्रशासन, पुलिस और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई। जेसीबी की मदद से खेत की मेड़ खुदवाकर पानी निकाला गया। सोमवती का शव शाम को ही निकाल लिया गया था, जबकि दुर्गा का शव गड्ढे में फंसा हुआ था। रेस्क्यू टीम को दुर्गा का शव बरामद करने में करीब सात घंटे लग गए, जो रात करीब दो बजे निकाल लिया गया।
हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए नागौद भेजा गया है।
प्रशासनिक लापरवाही उजागर
गौर करने वाली बात यह है कि कुछ ही दिन पहले रीवा में भी इसी तरह की बोरवेल दुर्घटना हुई थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में खुले बोरवेल बंद करने के निर्देश दिए थे। सतना कलेक्टर ने भी संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए थे कि सभी खुले बोरवेल को चिन्हित कर बंद कराया जाए, ताकि किसी की जान न जाए। बावजूद इसके, रेरुआ कला गांव में खुले बोरवेल के चलते दो मासूम बच्चियों की जान चली गई, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब जिम्मेदारी तय होगी ?
यह घटना प्रशासन की गंभीर लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का उदाहरण है। गांव के लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब निर्देश पहले से ही जारी थे, तो इस खतरनाक बोरवेल को क्यों नहीं बंद किया गया? क्या अब इन मासूमों की मौत के बाद जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही तय की जाएगी?
हादसा यह बताता है कि केवल आदेश जारी कर देना काफी नहीं, उनकी जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन जरूरी है — वरना ऐसी त्रासदियां दोहराई जाती रहेंगी।
