सावन के पहले सोमवार पर राजाधिराज महाकाल के अद्भुत दर्शन: भस्म आरती में रजत मुकुट, रुद्राक्ष और फूलों की माला से सजे भोलेनाथ
विशेष संवाददाता छमू गुरु की रिपोर्ट:
उज्जैन (शिखर दर्शन) // सावन के पहले सोमवार, 14 जुलाई को भगवान शिव के परम पावन ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था और भक्ति का महापर्व देखने को मिला। तड़के 2:30 बजे मंदिर के पट खुलते ही बाबा महाकाल की अलौकिक भस्म आरती का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर बाबा को पंचामृत से स्नान कराकर रजत मुकुट, त्रिशूल, भांग, चंदन और ड्रायफ्रूट से राजाधिराज का रूप प्रदान किया गया।
श्रावण मास के प्रथम सोमवार को श्रद्धा और उत्साह से ओतप्रोत होकर लाखों श्रद्धालु भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन करने मंदिर पहुंचे। भस्म आरती के पूर्व महाकाल का पंचामृत अभिषेक किया गया और फिर भांग, चंदन, फल-मिष्ठान से उन्हें भोग अर्पित किया गया। इस पावन बेला में बाबा को रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों से बनी फूलों की माला से श्रृंगारित किया गया।
आरती के समय मंदिर परिसर ‘जय महाकाल’, ‘हर हर महादेव’, ‘ॐ नमः शिवाय’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कही, मान्यता है कि नंदी के कान में कही गई प्रार्थना सीधे भोलेनाथ तक पहुंचती है।
आज शाम 4 बजे बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर भी निकलेंगे। यह परंपरा महाकाल की विशेष राजा रूपी मान्यता का प्रतीक है, जहां भक्त उन्हें साक्षात शासक मानते हैं और नगर भ्रमण को दिव्य दर्शन का सौभाग्य मानते हैं।
सावन के पहले सोमवार की इस भक्ति पूर्ण सुबह ने समूचे उज्जैन को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। भक्तों के चेहरों पर आस्था की ज्योति और हृदय में शिव नाम की गूंज साफ झलक रही थी।
⚠️ डिसक्लेमर:
शिखर दर्शन किसी प्रकार के चमत्कारिक दावे या धार्मिक परिणामों की पुष्टि नहीं करता है। यह समाचार श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और मंदिर में संपन्न आयोजनों पर आधारित है। किसी भी निर्णय या मान्यता से पहले व्यक्तिगत विवेक और विशेषज्ञ से परामर्श करें।
