मध्यप्रदेश

भोपाल टीआईटी कॉलेज गैंगरेप मामला: छठे आरोपी की जमानत खारिज, सभी आरोपी जेल में

भोपाल (शिखर दर्शन) // मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के टीआईटी कॉलेज में लव जिहाद का सनसनीखेज मामला सामने आया था , जिसमें छात्राओं से गैंगरेप और जबरन धर्म परिवर्तन का आरोप लगा था । पुलिस ने इस मामले के छठे आरोपी अबरार को 20 जून को गिरफ्तार किया था, लेकिन उसकी जमानत याचिका हाल ही में कोर्ट ने खारिज कर दी है।

न्यायाधीश नीलू राजीव श्रृंगीऋषि ने यह फैसला सुनाया है, जिससे गैंगरेप के सभी आरोपी जेल में बंद हैं।

पुलिस और राष्ट्रीय महिला आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों ने धर्म के आधार पर छात्राओं से दोस्ती कर उन्हें नशे में धकेलकर तीन युवतियों के साथ दुष्कर्म किया। फरहान खान, साहिल खान और अली खान ने नाम बदलकर वारदात को अंजाम दिया।

इसके साथ ही आरोपियों ने पीड़िताओं को महंगे गिफ्ट देकर फंसाया और उनकी आपत्तिजनक फोटो-वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि आरोपी आर्थिक रूप से सामान्य परिवारों से होने के बावजूद भव्य जीवनशैली जीते थे, जो ड्रग्स और अपराधी नेटवर्क से जुड़े होने का संकेत देती है।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले की गहराई से जांच की और जबरन धर्म परिवर्तन के दबाव, ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना की भी पुष्टि की है।

यह मामला न केवल भोपाल में बल्कि पूरे प्रदेश में सामाजिक और नैतिक चिंता का विषय बना हुआ है। न्याय व्यवस्था इस मामले में सख्ती बरत रही है और पीड़िताओं के अधिकारों की रक्षा कर रही है।

नशा देकर आपत्तिजनक फोटो, वीडियो बनाए

राष्ट्रीय महिला आयोग की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि कुछ अपराधी छात्राओं को नशे में धकेलकर उनके आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बनाते हैं, जिनका इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया जाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि आरोपियों ने छात्राओं को महंगे गिफ्ट देकर फंसाया, फिर उनके खिलाफ इन आपत्तिजनक सामग्री का सहारा लेकर मानसिक दबाव बनाया गया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पीड़िताओं को नशा देकर जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव भी बनाया गया। आयोग ने पाया कि आरोपी अधिकतर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से थे, लेकिन उनकी भव्य जीवनशैली ड्रग्स और अपराध के एक व्यापक नेटवर्क से जुड़े होने का संकेत देती है।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों से शीघ्र कार्रवाई करने और पीड़िताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। साथ ही, सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की भी आवश्यकता जताई गई है ताकि इस तरह की घटनाएं रोकने में मदद मिल सके।

आयोग की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि ऐसे अपराधों का मुकाबला केवल कानूनी कार्रवाई से नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और सशक्त सुरक्षा तंत्र के माध्यम से ही संभव है।

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