शुभांशु शुक्ला ने स्पेस में क्यों पहना कंडोम ? क्या अंतरिक्ष में करते हैं सेक्स ? जानिए सच्चाई जो आपको हैरान कर देगी

भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला के मिशन से जुड़ा रोचक खुलासा
नई दिल्ली // भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला इन दिनों एक्सिअम मिशन-4 के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में हैं और अब तक 5 दिन बिता चुके हैं। उनके इस मिशन के दौरान एक दिलचस्प विषय फिर चर्चा में है—आखिर क्यों अंतरिक्ष यात्री स्पेस में जाने से पहले ‘कंडोम’ जैसी डिवाइस पहनते हैं?
दरअसल, ये कोई सामान्य कंडोम नहीं बल्कि एक विशेष डिवाइस होती है, जो अंतरिक्ष में सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (Microgravity) की स्थिति में यूरिन को कंट्रोल और स्टोर करने के लिए बनाई गई है। नासा के पूर्व एस्ट्रोनॉट रस्टी श्वाइकार्ट के अनुसार, पहले पुरुष अंतरिक्ष यात्री एक कंडोमनुमा डिवाइस पहनते थे, जिसे ट्यूब के जरिए यूरिन संग्रह प्रणाली से जोड़ा जाता था।

इसमें शुरुआत में दिक्कतें भी आती थीं क्योंकि सभी एस्ट्रोनॉट्स के शरीर की बनावट एक जैसी नहीं होती। डिवाइस का फिट न होना या लीक होना आम समस्या थी। इसके बाद नासा ने तीन साइज—स्मॉल, मीडियम और लार्ज पेश किए। लेकिन एस्ट्रोनॉट्स अक्सर बड़ा साइज चुनते थे, जिससे ‘पुरुष अहं’ की भावना जुड़ी होती थी। इसी को ध्यान में रखते हुए बाद में इन साइजों का नाम बदलकर ‘लार्ज’, ‘एक्स्ट्रा लार्ज’ और ‘हीरो’ रख दिया गया।

अब समय के साथ तकनीक भी बदल चुकी है। आजकल यूनिसेक्स सिस्टम और मॉडर्न स्पेस सूट्स का उपयोग होता है, जो पुरुष और महिला दोनों एस्ट्रोनॉट्स के लिए काम करता है। यह सिस्टम अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और माइक्रोग्रैविटी के अनुकूल है।
अंतरिक्ष यात्रा जितनी रोमांचक दिखती है, असल में उसके पीछे इतनी सूक्ष्म प्लानिंग होती है, जो इंसानी जरूरतों के हर पहलू को ध्यान में रखती है—even nature’s call.
