नेता प्रतिपक्ष भरत कश्यप से पत्रकारों ने मांगे 50 हजार रुपए, वीडियो वायरल करने की दी थी धमकी – सिविल लाइन थाने में FIR

महिला के साथ अवैध संबंध की झूठी खबर फैलाने का आरोप, पीड़िता ने की आत्महत्या की कोशिश
बिलासपुर (शिखर दर्शन) // बिलासपुर नगर निगम में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष व वार्ड क्रमांक 19 के पार्षद भरत कश्यप ने उन्हें बदनाम करने और ब्लैकमेल करने के आरोप में चार कथित पत्रकारों के खिलाफ सिविल लाइन थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है। भरत कश्यप का आरोप है कि पत्रकारों ने एक महिला के साथ उनके अवैध संबंध का झूठा आरोप लगाते हुए एक वीडियो वायरल करने की धमकी दी और बदले में 50 हजार रुपए की मांग की।
भरत कश्यप ने शिकायत में बताया कि दो दिन पहले वेबपोर्टल से जुड़े पत्रकार नीरज उर्फ अप्पू शुक्ला, संतोष मिश्रा, जिया उल्लाह खान और एक अन्य व्यक्ति उनके नेहरू नगर स्थित कार्यालय पहुंचे। वहां इन पत्रकारों ने कथित तौर पर कहा कि उनके पास एक महिला के साथ भरत कश्यप का आपत्तिजनक वीडियो है और अगर वह चाहते हैं कि यह वीडियो वायरल न हो, तो उन्हें 50 हजार रुपए देने होंगे। कश्यप ने जब पैसे देने से इनकार किया, तो पत्रकारों ने वीडियो और अवैध संबंध की झूठी खबर सोशल मीडिया में वायरल कर दी।
घटना के बाद नेता प्रतिपक्ष भरत कश्यप ने इसे उनकी छवि धूमिल करने की साजिश बताते हुए सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी पत्रकारों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
महिला ने भी खाई थी ज़हर, 6 लोगों पर मारपीट और धमकी का मामला दर्ज
इस पूरे प्रकरण में पीड़ित महिला ने भी अपनी ओर से पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है। महिला का आरोप है कि 21 जून को कुछ महिलाओं ने उसके ऊपर पार्षद भरत कश्यप से अवैध संबंध होने का आरोप लगाया और राशन कार्ड नहीं बनाने जैसी बातें कहकर उसकी छवि खराब करने की कोशिश की। यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मानसिक तनाव में आकर महिला ने ज़हर खा लिया था। उसे तत्काल सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया।
महिला के बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपी आकाश दरयानी, मोनू ठाकुर, रामप्रसाद धीमर और तीन महिलाओं के खिलाफ जान से मारने की धमकी और मारपीट के मामले में FIR दर्ज कर ली है।
पुलिस दोनों मामलों की जांच कर रही है और जल्द ही आरोपियों से पूछताछ की जाएगी। मामला राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील बन गया है, जिस पर शहर भर में चर्चा तेज हो गई है।

