छत्तीसगढ़ में मानसून की बेरुखी: अब तक केवल 55 मिमी औसत वर्षा, धान की बुआई पर संकटधान की 39 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले मात्र 70 हजार हेक्टेयर में ही हो पाई है बुआई
रायपुर (शिखर दर्शन) //
छत्तीसगढ़ में इस वर्ष मानसून की धीमी शुरुआत से किसान परेशान हैं। जून अंत तक प्रदेश में औसतन मात्र 55 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले 10 वर्षों की औसत 101 मिमी के मुकाबले सिर्फ 54 प्रतिशत है। बारिश की इस भारी कमी के चलते प्रदेश में धान समेत अन्य खरीफ फसलों की बुआई पर संकट मंडरा रहा है।
खरीफ सीजन 2025 के लिए सरकार ने धान की बुआई का लक्ष्य 39 लाख हेक्टेयर निर्धारित किया है, लेकिन अब तक सिर्फ 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुआई हो पाई है। अल्प और खंडवर्षा के कारण किसान खेतों की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं और आसमान की ओर टकटकी लगाए अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
राजस्व व आपदा प्रबंधन विभाग के राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के मुताबिक, प्रदेश के 33 जिलों में से 28 जिलों में औसत से कम वर्षा दर्ज की गई है। नारायणपुर सबसे पीछे है जहां अब तक केवल 13.5 मिमी (8.6%) बारिश हुई है। वहीं जशपुर जिले में सबसे अधिक 188.4 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
जिलेवार वर्षा का हाल
सरगुजा संभाग के कुछ जिलों को छोड़ दें तो पूरे प्रदेश में बारिश का स्तर बेहद कम है। सुकमा (11%), बेमेतरा (16%), धमतरी (18%), कोंडागांव (19%), मुंगेली (19%), मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (20%), बिलासपुर (26%), कांकेर (30%), राजनांदगांव (31%) और बालोद (35%) जैसे जिलों में स्थिति चिंताजनक है।
रायपुर जिले में केवल 38.6 मिमी बारिश हुई है, जबकि बलौदाबाजार में 41.9 मिमी, महासमुंद में 30.4 मिमी, गरियाबंद में 47.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। बिलासपुर (23.1 मिमी), मुंगेली (14.8 मिमी), राजनांदगांव (25.9 मिमी), बेमेतरा (14.6 मिमी), मोहला-मानपुर (21.5 मिमी), और कोंडागांव (26.9 मिमी) में हालात गंभीर बने हुए हैं।
वहीं सरगुजा संभाग के जशपुर (188.4 मिमी), बलरामपुर (187.7 मिमी), कोरिया (127.0 मिमी) और रायगढ़ (112.7 मिमी) जिलों में औसत से अधिक बारिश हुई है, जिससे वहां बुआई की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर मानी जा रही है।
किसानों की चिंता बढ़ी
मानसून की इस देरी से प्रदेश भर के किसानों में चिंता का माहौल है। यदि आगामी दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो खरीफ उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई के पहले सप्ताह तक सामान्य वर्षा नहीं हुई, तो फसलों के उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
प्रदेश सरकार की ओर से अब निगाहें मानसून की गतिविधियों पर टिकी हैं। स्थिति को देखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क कर दिया गया है ताकि आवश्यकता पड़ने पर राहत और पुनर्व्यवस्था के उपाय समय रहते किए जा सकें।
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