पाकिस्तान के सिंध में फिर हिंदू परिवार पर कहर: चार भाई-बहनों का अपहरण कर जबरन इस्लाम धर्म स्वीकार कराया, मां की गुहार भी अनसुनी
शाहदादपुर (सिंध) // पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार का सिलसिला एक बार फिर भयावह मोड़ पर पहुंच गया है। शाहदादपुर से सामने आई ताजा घटना में एक हिंदू परिवार के चार बच्चों—तीन बेटियों और एक बेटे—का अपहरण कर जबरन धर्मांतरण कराए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित बच्चों की मां ने बिलखते हुए बताया कि उसका सब कुछ छिन गया, उसकी तीनों बेटियां अब उसके पास नहीं रहीं।
क्या है मामला ?
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना शाहदादपुर शहर की है, जहां स्थानीय कंप्यूटर शिक्षक फरहान खासखेली और उसके सहयोगी जुल्फिकार खासखेली पर चार बच्चों को बहला-फुसलाकर अगवा करने और इस्लाम कबूल करवाने का आरोप है। पीड़िता मां ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में फरहान पर सीधा आरोप लगाते हुए बताया कि उसके नाबालिग बेटे हरजीत (13) को भी जबरन इस्लाम धर्म में शामिल किया गया, जबकि वह इतनी उम्र में धर्म का मतलब तक नहीं समझता।
मां ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी से मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। इस बीच, सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में बच्चों का जबरन धर्मांतरण दिखाया गया, जिसे मानवाधिकार संगठनों और हिंदू समुदाय ने ‘सांस्कृतिक आतंकवाद’ बताया है।
अदालत की कार्यवाही और मीडिया का दावा
पुलिस ने बच्चों को कराची से बरामद कर शाहदादपुर की अदालत में पेश किया। कोर्ट ने दो बालिग बेटियों—जिया बाई और दीया बाई—को आश्रय गृह भेजने और दो नाबालिगों—दिशा बाई (15) और हरजीत कुमार—को माता-पिता को सौंपने का आदेश दिया। हालांकि, पाकिस्तानी मीडिया का दावा है कि चारों बच्चों ने स्वेच्छा से इस्लाम कबूल किया है, जबकि परिवार का कहना है कि बच्चे पुलिस और सामाजिक दबाव में बयान दे रहे हैं।
पीड़ित परिवार के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि बच्चों को कराची में बंधक बनाकर जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया, लेकिन अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में फरहान और जुल्फिकार को अपहरण के आरोप से बरी कर दिया।
सवालों के घेरे में बाल धर्मांतरण
हिंदू पंचायत के प्रमुख राजेश कुमार ने इस घटना को सामुदायिक त्रासदी करार दिया। उन्होंने कहा, “क्या ये मासूम बच्चे इतने परिपक्व हैं कि अपने धर्म को बदलने जैसा बड़ा फैसला खुद ले सकें?” राजेश ने यह भी चेताया कि पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ यह क्रमशः बढ़ती हिंसा अब बच्चों को भी नहीं बख्श रही।
अल्पसंख्यकों के लिए डर का माहौल
सिंध सहित पाकिस्तान के कई हिस्सों से हिंदू लड़कियों और अब लड़कों के जबरन धर्मांतरण, अपहरण और विवाह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह धार्मिक कट्टरता, पितृसत्ता और प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है, जो देश के अल्पसंख्यक समुदायों को असुरक्षित बनाता है।
2016 में सिंध प्रांतीय विधानसभा ने जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए एक विधेयक पारित करने की कोशिश की थी, लेकिन कट्टरपंथी धार्मिक दलों के विरोध के चलते यह कानून कभी लागू नहीं हो पाया।
निष्कर्ष
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय, की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता अभी भी खतरे से खाली नहीं है ।
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