मध्यप्रदेश

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर उज्जैन में खगोल विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा का संगम, सीएम करेंगे तारामंडल का लोकार्पण

भोपाल (शिखर दर्शन) // अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश में एक ऐतिहासिक संगम देखने को मिलेगा, जहां योग, खगोल विज्ञान और भारतीय परंपरा का अद्भुत मेल उज्जैन के ग्राम डोंगला में देखने को मिलेगा। राज्य स्तरीय योग दिवस कार्यक्रम की थीम “एक पृथ्वी – एक स्वास्थ्य के लिए योग” रखी गई है, जिसका आयोजन राजधानी भोपाल के “अटल पथ” पर किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सुबह राज्य स्तरीय योगाभ्यास कार्यक्रम में भाग लेंगे और 11:10 बजे उज्जैन पहुंचकर राम मंदिर किस्टल ए में स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद वे दोपहर 12:15 बजे ग्राम डोंगला में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे, जहां विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा का महोत्सव आयोजित किया जा रहा है।

डोंगला स्थित पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला में मुख्यमंत्री शंकु यंत्र के माध्यम से ‘शून्य छाया’ का वैज्ञानिक अवलोकन करेंगे। इसके साथ ही वे वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला में आयोजित “खगोल विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ करेंगे। संगोष्ठी में देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद शामिल होंगे, जो भारतीय खगोल ज्ञान परंपरा की आधुनिक वैज्ञानिक व्याख्या पर संवाद करेंगे।

मुख्यमंत्री इस अवसर पर अत्याधुनिक डिजिटल तारामंडल का लोकार्पण भी करेंगे, जो आचार्य वराहमिहिर न्यास एवं अवादा फाउंडेशन द्वारा निर्मित है। इस तारामंडल में विशेष शो का प्रदर्शन भी होगा, जो खगोल विज्ञान को आमजन और विद्यार्थियों के लिए आकर्षक और उपयोगी बनाएगा।

गौरतलब है कि ग्राम डोंगला से कर्क रेखा गुजरती है, और यह स्थान प्राचीन काल से खगोल एवं ज्योतिष शास्त्र के लिए विशेष महत्व रखता है। वर्ष 2013 में मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा यहां वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला की स्थापना की गई थी। इसमें भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), बैंगलोर और आर्यभट्ट प्रशिक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES), नैनीताल का तकनीकी सहयोग रहा है।

यह वेधशाला 5 मीटर डोम में स्थापित 20 इंच के आधुनिक टेलीस्कोप से सुसज्जित है, जो खगोल वैज्ञानिक गतिविधियों, शोध एवं अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए देशभर के छात्रों, शोधकर्ताओं और विज्ञान प्रेमियों के लिए एक समर्पित मंच प्रदान करती है।

इस अनूठे आयोजन के माध्यम से मध्यप्रदेश एक बार फिर भारतीय परंपरा, विज्ञान और संस्कृति को एक मंच पर लाकर गौरवशाली अतीत को वर्तमान से जोड़ने का कार्य कर रहा है ।

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