21 जून : वैष्णव स्वरूप में अलंकृत हुए भगवान श्री महाकालेश्वर, मस्तक पर तिलक अर्पित कर रजत आभूषणों से किया गया दिव्य श्रृंगार, करें ऑनलाइन दर्शन

उज्जैन (शिखर दर्शन) // आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष दशमी तिथि पर शनिवार की भोर में श्री श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के पट जैसे ही प्रातः 4 बजे खोले गए, पूरा मंदिर परिसर “जय जय श्री महाकाल”, “हर हर शंभू” और “ॐ नमः शिवाय” के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
दिन की शुरुआत भगवान श्री महाकालेश्वर के विशेष जलाभिषेक से हुई, जिसके बाद पंचामृत—दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से भगवान का विधिवत अभिषेक पूजन संपन्न हुआ। सुगंधित जल से स्नान के पश्चात श्री महाकाल का वैष्णव स्वरूप में दिव्य श्रृंगार किया गया।
श्री महाकाल को रजत से निर्मित शेषनाग मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला तथा पुष्पों से बनी मनोहारी माला धारण कराई गई। मस्तक पर वैष्णव तिलक अर्पित कर भगवान का श्रीविष्णु स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया। बाबा को फल, मिष्ठान एवं ड्रायफ्रूट का विशेष भोग भी समर्पित किया गया।
सुबह की पावन भस्म आरती में देशभर से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कहकर आशीर्वाद की याचना की। पूरा वातावरण भक्तिरस में डूबा रहा और श्रद्धालु भावविभोर होकर श्री महाकाल की स्तुति करते रहे।
मंदिर समिति द्वारा ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था भी की गई, जिससे देश-विदेश में बैठे भक्तजन भी अपने आराध्य श्री महाकालेश्वर के दिव्य दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर सकें।
यह पावन अवसर श्रद्धालुओं के लिए आस्था, भक्ति और अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति से परिपूर्ण रहा।



