19 जून महाकाल भस्म आरती: त्रिशूल और रुद्राक्ष से हुआ भगवान महाकाल का अलौकिक श्रृंगार, दर्शन को उमड़े भक्त
विशेष संवाददाता छमू गुरु की रिपोर्ट:
उज्जैन (शिखर दर्शन) //
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार, 19 जून को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर अल सुबह श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह 4 बजे जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, भक्तों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। भगवान महाकाल का पारंपरिक रूप से जलाभिषेक किया गया, जिसके बाद पंचामृत—दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस—से उनका शुद्धिकरण और पूजन संपन्न हुआ।
इस विशेष अवसर पर बाबा महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। अलौकिक श्रृंगार में भगवान को रुद्राक्ष की माला पहनाई गई, मस्तक पर त्रिशूल तिलक लगाया गया और शेषनाग का रजत मुकुट भी धारण कराया गया। गुलाब की सुगंधित पुष्पमालाएं उन्हें अर्पित की गईं और मिष्ठान व फलों का भोग भी समर्पित किया गया।
भोर की इस भस्म आरती में देशभर से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शामिल होकर दर्शन लाभ प्राप्त किया। आरती के दौरान श्रद्धालु ‘जय जय श्री महाकाल’, ‘हर हर महादेव’, और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयघोष करते रहे। पूरा मंदिर परिसर शिवभक्ति के उत्सव में डूबा रहा।
भक्तों ने नंदी महाराज के कान के समीप अपनी मनोकामनाएं भी निवेदित कीं, जिन्हें वे बाबा महाकाल तक पहुंचाने का माध्यम मानते हैं। इस आध्यात्मिक माहौल में भक्तों की आस्था और भक्ति की शक्ति स्पष्ट झलक रही थी।
भस्म आरती के ये दिव्य क्षण न केवल शिवभक्तों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बने, बल्कि महाकाल की नगरी उज्जैन एक बार फिर से शिवभक्ति में सराबोर हो उठी।
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