“महाकाल का श्रृंगार त्रिनेत्र व चंद्र से हुआ पूर्ण, सुगंधित फूलों की मालाओं से महक उठा मंदिर परिसर”
उज्जैन (शिखर दर्शन) // मंगलवार 17 जून की सुबह उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में ब्रह्म मुहूर्त में सम्पन्न हुई भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का अद्भुत श्रृंगार किया गया। मस्तक पर त्रिनेत्र और चंद्र अर्पित कर, सुगंधित फूलों की मालाओं से उनका अलौकिक श्रृंगार किया गया, जिसने दर्शनार्थियों को भक्ति और भाव-विभोर कर दिया।
भस्म आरती के दौरान बाबा को पहले जल, चंदन और भस्म से स्नान कराया गया। फिर उनके मस्तक पर त्रिनेत्र का चिन्ह उकेरा गया और चंद्र अर्पित किया गया, जो शिव के सौम्य व तात्त्विक स्वरूप का प्रतीक है। इसके पश्चात गुलाब, मोगरा, चमेली और अन्य सुगंधित फूलों से श्रृंगार कर बाबा को भव्य रूप में सजाया गया।
आरती के दौरान ‘हर हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयघोषों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने इस दिव्य आरती का साक्षात दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
महाकाल की यह भस्म आरती विश्व में एकमात्र ऐसी आरती है, जिसमें शिव को भस्म अर्पित कर रुद्र रूप में पूजा जाता है। मंगलवार को विशेष मान्यता के कारण भक्तों की संख्या और आस्था में और अधिक वृद्धि देखी गई।
मंदिर प्रबंधन द्वारा दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित तरीके से संचालित किया गया, जिससे हजारों श्रद्धालुओं को शांतिपूर्ण व सहज दर्शन का सौभाग्य मिला।
महाकाल की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शिवभक्तों के लिए एक दिव्य अनुभूति है – जहां वे भगवान शिव के साक्षात स्वरूप को अपने नेत्रों से देख पाते हैं।
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