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Ahmedabad Plane Crash: अमेरिकी नेवी के पूर्व पायलट का बड़ा दावा, बताए हादसे के 3 संभावित कारण — क्या RAT फेल्योर बना दुर्घटना की वजह ?

अहमदाबाद (शिखर दर्शन) //
अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद एयर इंडिया का एक बोइंग 787 विमान भीषण दुर्घटना का शिकार हो गया। विमान शहर के एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से टकराया और कुछ ही क्षणों में आग की लपटों में घिर गया। इस हृदयविदारक हादसे ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। हादसे में अधिकांश लोग जान गंवा बैठे, जबकि एकमात्र जीवित बचे व्यक्ति विश्वास के बयान ने इस दुर्घटना की गंभीरता और संभावित तकनीकी खामियों पर रोशनी डाली है।

विमानन विशेषज्ञ और अनुभवी पायलट कैप्टन स्टीव स्चाइबनर (Captain Steve Scheibner) ने इस दुर्घटना को लेकर तीन अहम संभावनाएं गिनाई हैं, जो इस बात को समझने में मदद करती हैं कि अत्याधुनिक तकनीक से लैस बोइंग 787 विमान भी क्यों विफल रहा। उन्होंने दुर्घटना के वीडियो विश्लेषण के आधार पर RAT (Ram Air Turbine) सक्रिय होने की आशंका जताई है, जो संकेत देता है कि विमान में गंभीर तकनीकी विफलता हुई थी।

तीन संभावित कारण:

1. दोनों इंजनों का एक साथ फेल होना:
कैप्टन स्टीव के मुताबिक, सबसे प्रमुख संभावना दोनों इंजनों के एक साथ फेल होने की है, जिससे विमान हवा में स्थिर नहीं रह सका। यह स्थिति उस समय उत्पन्न हो सकती है जब विमान किसी पक्षियों के बड़े झुंड से टकरा जाए और इंजन खराब हो जाएं। इससे “लिफ्ट लॉस” हो सकता है, यानी विमान के पंखों को पर्याप्त हवा नहीं मिलती और वह ऊँचाई नहीं पकड़ पाता।

2. फ्लैप्स न लगाना या तकनीकी सेटिंग में चूक:
दूसरी संभावना यह हो सकती है कि पायलट टेकऑफ से पहले फ्लैप्स सेट करना भूल गए हों। फ्लैप्स टेकऑफ के समय विमान को लिफ्ट देने में सहायता करते हैं। हालांकि कैप्टन स्टीव का मानना है कि यह संभावना बहुत कम है, क्योंकि बोइंग 787 जैसे आधुनिक विमान में ऐसी गलती होते ही कॉकपिट में तेज अलार्म बजता है और स्क्रीन पर चेतावनी दिखती है।

3. गलत लीवर खींचना:
तीसरी और बेहद गंभीर संभावना यह मानी जा रही है कि टेकऑफ के दौरान पायलट या को-पायलट ने गलती से गलत लीवर खींच लिया हो। उदाहरण के तौर पर, यदि को-पायलट ने गियर के बजाय फ्लैप्स का लीवर ऊपर खींच दिया, तो टेकऑफ के लिए जरूरी सतहें गायब हो जाती हैं और विमान असंतुलित हो जाता है।

क्या दुर्घटना टाली जा सकती थी?

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि उस क्षण पायलट को यह तुरंत समझ में आ जाता कि फ्लैप्स ऊपर चले गए हैं, तो वह उन्हें फिर से नीचे करके स्थिति को संभाल सकते थे। लेकिन टेकऑफ जैसे नाजुक समय में निर्णय लेने के लिए कुछ ही सेकंड मिलते हैं, और उस समय कॉकपिट में तेज अलार्म, तनाव और भ्रम की स्थिति में सही निर्णय लेना बेहद कठिन होता है।

फिलहाल, दुर्घटना के असली कारणों का खुलासा ब्लैक बॉक्स की रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। भारत में जांच एजेंसियां इस मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय विमानन विशेषज्ञ भी अपनी पैनी निगाह इस हादसे पर रखे हुए हैं।

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