युक्तियुक्तकरण में भ्रष्टाचार का आरोप: शिक्षक साझा मंच ने राज्य सरकार और अफसरों की खोली पोल, आंदोलन की चेतावनी
रायपुर (शिखर दर्शन) // राजधानी रायपुर के मोतीबाग स्थित प्रेस क्लब में रविवार को शिक्षक साझा मंच छत्तीसगढ़ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। मंच के सभी 23 संयोजकों ने युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को शिक्षा विभाग का सबसे बड़ा घोटाला बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है और इससे हजारों शिक्षक मानसिक और व्यावसायिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं।
मंच ने स्पष्ट किया कि वे युक्तियुक्तकरण के विरोध में नहीं हैं, बल्कि वे 2008 के सेटअप को लागू कर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं। संयोजकों ने बताया कि यदि सरकार ने यह मांग नहीं मानी तो 10 जून को सभी 33 जिलों में कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा जाएगा, 13 जून को संभाग मुख्यालयों में प्रदर्शन कर संभागायुक्त और शिक्षा संचालकों को ज्ञापन दिया जाएगा और 16 जून से राज्य भर में स्कूलों का बहिष्कार किया जाएगा।
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, मनमानी से की गई काउंसलिंग
शिक्षक नेताओं ने बताया कि युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। मनचाहे शिक्षकों को लाभ पहुंचाया गया, जबकि जिनका कोई संपर्क नहीं था, उन्हें दूरस्थ क्षेत्रों में भेज दिया गया। कई जिलों में अभी तक अतिशेष शिक्षकों की सूची तक प्रकाशित नहीं की गई। दावा-आपत्ति और त्रुटि सुधार का मौका नहीं दिया गया। आधी रात में सूची जारी कर पुलिस बल की मौजूदगी में दबाव पूर्वक काउंसलिंग कराई गई।
विदेश में शिक्षक, फिर भी कर दी गई काउंसलिंग और पोस्टिंग
प्रेस वार्ता में खुलासा किया गया कि एक शिक्षक जो वर्तमान में विदेश यात्रा पर हैं, उनकी न केवल काउंसलिंग कर दी गई बल्कि उन्हें रिलीव भी कर दिया गया और नए विद्यालय में पदस्थ भी कर दिया गया। यह दर्शाता है कि सिस्टम में पारदर्शिता का अभाव है और अंदरखाने पूरा ‘सेटिंग-गेटिंग’ का खेल चल रहा है।
विकलांग शिक्षकों को भी नहीं छोड़ा, नियमों की उड़ाई धज्जियां
संयोजकों ने आरोप लगाया कि काउंसलिंग के दौरान न केवल एकल शिक्षकीय और शिक्षकविहीन स्कूलों को प्राथमिकता नहीं दी गई बल्कि कई दिव्यांग शिक्षकों को 100–150 किमी दूर स्थानांतरित कर दिया गया। वरिष्ठ शिक्षकों को अतिशेष घोषित कर कनिष्ठों को बनाए रखा गया, जो नियमों के सीधे उल्लंघन हैं।
50,000 से अधिक शिक्षक पद समाप्त, शिक्षा की गुणवत्ता पर खतरा
शिक्षक नेताओं का आरोप है कि विभाग स्कूलों में पद समाप्त कर रहा है। कई प्राथमिक स्कूलों से एक-एक शिक्षक कम कर दिए गए हैं। मर्ज किए गए स्कूलों में प्रधान पाठक का पद हटा दिया गया है। इससे प्रदेश में 50,000 से अधिक शिक्षकों के पद खत्म हो चुके हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ेगा।
नेताओं ने दी आंदोलन की चेतावनी
मंच के संयोजकों—मनीष मिश्रा, केदार जैन, वीरेंद्र दुबे, संजय शर्मा, विकास राजपूत, कृष्णकुमार नवरंग सहित 23 शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने युक्तियुक्तकरण को वापस लेकर 2008 का सेटअप लागू नहीं किया, तो शिक्षक समुदाय आंदोलन करने को मजबूर होगा।
निष्कर्ष:
शिक्षक साझा मंच की प्रेस कॉन्फ्रेंस से यह साफ हो गया है कि प्रदेश में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया न केवल अव्यवस्थित रही बल्कि भ्रष्टाचार से ग्रसित भी रही है। यदि सरकार समय रहते इस मुद्दे का समाधान नहीं करती, तो राज्य की शिक्षा व्यवस्था एक बड़े आंदोलन की ओर बढ़ सकती है।
