रायपुर संभाग

युक्तियुक्तकरण नीति के खिलाफ शिक्षक संगठनों का प्रदर्शन तेज, मंत्रालय में सौंपा गया संयुक्त ज्ञापन

युक्तियुक्तकरण नीति के विरोध में 21 शिक्षक संगठन एकजुट, सरकार को सौंपा संयुक्त ज्ञापन
चार सूत्रीय मांगों को लेकर दी चेतावनी — जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो होगा राज्यव्यापी आंदोलन

रायपुर (शिखर दर्शन) //
राज्य के 21 प्रमुख शिक्षक संगठनों ने युक्तियुक्तकरण नीति को रद्द करने सहित चार प्रमुख मांगों को लेकर मंगलवार, 20 मई को राजधानी रायपुर स्थित मंत्रालय पहुंचकर सरकार को संयुक्त ज्ञापन सौंपा। संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो राज्यभर में उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।

ज्ञापन देने की यह कार्रवाई पहले सोमवार, 19 मई को प्रस्तावित थी, जिसे अपरिहार्य कारणों से स्थगित किया गया था। बावजूद इसके, तय कार्यक्रम के अनुसार सभी संगठन एकजुट होकर मंत्रालय पहुंचे और शासन के नाम ज्ञापन सौंपा।

शिक्षक संगठनों की चार प्रमुख मांगें:

  1. युक्तियुक्तकरण नीति को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।
  2. सोना साहू प्रकरण की तर्ज पर सभी पात्र शिक्षकों को एरियर सहित क्रमोन्नति वेतनमान दिया जाए तथा इसके लिए सामान्य आदेश (जनरल ऑर्डर) जारी किया जाए।
  3. प्रथम सेवा की गणना कर पेंशन सहित समस्त लाभ प्रदान किए जाएं।
  4. प्राचार्य पदोन्नति में बीएड की अनिवार्यता समाप्त की जाए तथा डीएड/बीएड दोनों प्रशिक्षित शिक्षकों को समान अवसर दिए जाएं।

संघर्ष के लिए तैयार शिक्षक संगठन
राज्य के प्रमुख 21 शिक्षक संगठनों के प्रदेश अध्यक्ष — मनीष मिश्रा, केदार जैन, विकास राजपूत, कृष्णकुमार नवरंग, राजनारायण द्विवेदी, जाकेश साहू, भूपेंद्र बनाफर, शंकर साहू, भूपेंद्र गिलहरे, चेतन बघेल, गिरीश केशकर, लैलूंन भरतद्वाज, प्रदीप पांडे, प्रदीप लहरें, राजकिशोर तिवारी, कमल दास मार्चुले, प्रीतम कोशले, विक्रम राय, विष्णु प्रसाद साहू सहित अन्य ने संयुक्त बयान में कहा कि यदि सरकार ने शिक्षकों की वर्षों पुरानी न्यायोचित मांगों को नजरअंदाज किया, तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन छेड़ा जाएगा।

शिक्षकों की चेतावनी – अब और उपेक्षा नहीं सहेंगे
संयुक्त मंच ने सरकार को आगाह करते हुए कहा है कि शिक्षक समुदाय की लगातार उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि मांगे पूरी नहीं की गईं, तो उग्र आंदोलन और प्रदर्शन की पूरी तैयारी है।

यह घटनाक्रम राज्य की शिक्षा व्यवस्था की जमीनी सच्चाई और शिक्षक समुदाय की बढ़ती नाराजगी को दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस साझा दबाव के आगे क्या रुख अपनाती है।

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