TA बिल घोटाला: बिल्हा की BEO पर गंभीर आरोप, फर्जी दस्तावेजों के जरिए यात्रा भत्ता राशि हड़पने का मामला उजागर

जांच में खुली पोल: बिना स्वीकृति के निकाले 72,480 रुपये, निजी स्कूटी के नाम पर भी लिया टीए
बिलासपुर (शिखर दर्शन) // बिल्हा विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) सुनीता ध्रुव पर फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि उन्होंने मार्च 2025 में फर्जी यात्रा भत्ता (TA बिल) तैयार कर 72,480 रुपये की राशि नियमों को दरकिनार कर आहरित की। शिकायत मामले की शिकायत 23 अप्रैल को जिला शिक्षा अधिकारी से हुई है और उसके बाद 25 अप्रैल को जिला शिक्षा अधिकारी (D.E.O.) अनिल तिवारी ने जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक जांच में अनियमितता की पुष्टि हुई है।
बिना स्वीकृति के ट्रेजरी से राशि आहरित, नियमों की उड़ाई धज्जियां
शिकायत के अनुसार, सुनीता ध्रुव ने मार्च 2025 में यात्रा भत्ता का बिल बनाकर ट्रेजरी कार्यालय से सीधे भुगतान प्राप्त कर लिया, जबकि नियमानुसार, टीए बिल को पहले जिला शिक्षा अधिकारी से स्वीकृत कराना आवश्यक था। इतना ही नहीं, डीईओ कार्यालय द्वारा इस बिल पर आपत्ति भी जताई गई थी, जिसे दरकिनार कर राशि निकाल ली गई।
फर्जीवाड़े के तरीके: दूरी में अंतर, निजी स्कूटी को साधन बताया
जांच में सामने आया कि BEO ने एक ही कार्यालय की दूरी को अलग-अलग तिथियों में अलग-अलग दर्शाया, जिससे अधिक राशि प्राप्त की जा सके। वहीं, रायपुर की यात्रा के लिए निजी स्कूटी को यात्रा साधन बताया गया और उसी आधार पर टीए लिया गया, जो कि विभागीय प्रावधानों के विपरीत है। नियमों के अनुसार, यात्रा भत्ते का भुगतान सबसे किफायती साधन और न्यूनतम दूरी के आधार पर किया जाना चाहिए।
संकुल समन्वयकों को गलत तरीके से भुगतान
इसके अलावा, संकुल समन्वयकों को टीए दिए जाने में भी अनियमितता उजागर हुई है। सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत केवल चिन्हित समन्वयकों को निर्धारित बजट से भुगतान किया जा सकता है, लेकिन बिल्हा ( बी.ई.ओ. ) कार्यालय ने केवल 7 चिन्हित समन्वयकों को राशि जारी की, जबकि अन्य को वंचित रखा गया, जो की पूर्णतः नियम विरुद्ध है।
जांच समिति गठित, जल्द आ सकती है रिपोर्ट
इस पूरे मामले की जांच के लिए डीईओ ( जिला शिक्षा अधिकारी ) अनिल तिवारी ने रजेंद्र नगर स्कूल के प्राचार्य एम.एल. पटेल और डीईओ कार्यालय के सहायक ग्रेड-2 विजय तिवारी की दो सदस्यीय समिति गठित की है। टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे मामले की सूक्ष्मता से जांच करें और जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
अब सबकी निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं कि क्या BEO के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी या मामला फाइलों में दब जाएगा।



