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“भारत ने फिर दोहराई पुरानी गलती ? सीजफायर के फैसले पर एक्सपर्ट ने उठाए सवाल, बोले- आज भी भारत ने इतिहास से कुछ नहीं सीखा

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत का युद्धविराम फैसला, ब्रह्मा चेलानी समेत रक्षा विशेषज्ञों ने उठाए सवाल

नई दिल्ली (शिखर दर्शन) // 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 22 निर्दोष लोगों की हत्या के बाद भारत ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर चलाया। इस कार्रवाई में नौ आतंकी ठिकाने तबाह किए गए, जिनमें किसी भी आम पाकिस्तानी नागरिक या सैन्य बेस को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिशें की, लेकिन भारतीय सेना ने सटीक जवाबी कार्रवाई करते हुए लाहौर, पेशावर, सियालकोट और सरगोधा जैसे इलाकों में भारी तबाही मचाई।

इस बीच 6 मई को भारत द्वारा की गई एयर स्ट्राइक के बाद जारी तनाव अब घटने लगा है और शनिवार को दोनों देशों ने आपसी युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा की। हालांकि इस फैसले ने न सिर्फ रक्षा विशेषज्ञों को, बल्कि देश की जनता को भी हैरान कर दिया है।

ब्रह्मा चेलानी की तीखी प्रतिक्रिया
प्रसिद्ध जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट ब्रह्मा चेलानी ने भारत सरकार के युद्धविराम के फैसले पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि भारत सैन्य और रणनीतिक रूप से स्पष्ट बढ़त में था, लेकिन इस निर्णायक स्थिति को खो दिया गया। चेलानी ने कहा, “भारत जीत की दहलीज पर था, लेकिन अंत में मन मसोस कर रह गया। यह इतिहास से न सीखने की आदत और पराजय को आमंत्रित करने जैसी रणनीतिक भूल है।”

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की हवाई सुरक्षा कमजोर साबित हुई थी, जबकि भारत ने सीमित संसाधनों से अपने सभी सैन्य लक्ष्यों को भेदा। बावजूद इसके भारत द्वारा तनाव कम करने का निर्णय समझ से परे है।

‘इतिहास इस फैसले को अच्छा नहीं मानेगा’
चेलानी ने ऑपरेशन सिंदूर को प्रतीकात्मक और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसका अचानक समापन कई सवाल खड़े करता है। “इतिहास आज के निर्णय को अच्छी दृष्टि से नहीं देखेगा,” उन्होंने कहा।

गौरतलब है कि पाकिस्तान ने युद्धविराम को अपनी ‘जीत’ बताते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व में ‘यौम-ए-तशक्कुर’ (धन्यवाद दिवस) मनाने की घोषणा कर दी है, जिससे भारत में आक्रोश और निराशा की भावना और बढ़ गई है।

सेना अलर्ट पर, सीमाओं पर हालात सामान्य
सीजफायर की घोषणा के बाद पहली बार रातभर सीमाओं पर कोई फायरिंग नहीं हुई। हालांकि सेना पूरी तरह से अलर्ट पर है और जम्मू, जैसलमेर, पठानकोट सहित कई सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी कड़ी कर दी गई है।

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