3 मई महाकालेश्वर आरती: चंद्र और त्रिशूल से हुआ भगवान का श्रृंगार, शेषनाग मुकुट पहन भस्म आरती में दिए दर्शन
उज्जैन (शिखर दर्शन) //
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर शनिवार तड़के भगवान महाकालेश्वर का भव्य श्रृंगार और दिव्य भस्म आरती संपन्न हुई। सुबह ठीक 4 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर के कपाट खोले गए। सबसे पहले भगवान महाकाल का जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद पंचामृत—दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस—से विधिवत अभिषेक पूजन किया गया।
बाबा महाकाल के मस्तक पर चंद्र और त्रिशूल अर्पित किए गए। भांग, चंदन, फूलों की माला और आभूषणों से उनका दिव्य श्रृंगार किया गया। उन्हें पवित्र भस्म चढ़ाई गई। इस अलौकिक दर्शन में भगवान महाकाल ने शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला धारण की। उन्हें सुगंधित पुष्पों से बनी माला पहनाई गई और फल-मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया।
सुबह की भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शामिल होकर दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त किया। भक्तों ने नंदी महाराज के कान में जाकर अपनी मनोकामनाएं प्रकट कीं। पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल”, “हर हर महादेव” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से गूंज उठा।
भक्तों के इस आस्था और श्रद्धा से परिपूर्ण माहौल में बाबा महाकाल की दिव्यता और ऊर्जा हर भक्त के हृदय में समा गई।
