पाकिस्तान की शर्मनाक करतूतः अपने ही नागरिकों को अपनाने से किया इनकार, वाघा बॉर्डर गेट किया बंद
नई दिल्ली (शिखर दर्शन) //
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक और सीमा संबंधों में जबरदस्त तनाव उत्पन्न हो गया है। इस हमले में आतंकियों ने टारगेट किलिंग के तहत धर्म पूछकर 25 हिंदू पर्यटकों सहित कुल 26 लोगों की निर्मम हत्या कर दी थी। भारत ने इस हमले के पीछे पाकिस्तान में बैठे आतंकवादियों का हाथ बताया है, जिसके बाद से पाकिस्तान पर कई तरह की सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं।
तनाव की स्थिति को देखते हुए गुरुवार को अटारी-वाघा बॉर्डर को पूरी तरह बंद कर दिया गया। इससे दोनों देशों के बीच आवाजाही रुक गई, जिससे 70 पाकिस्तानी नागरिक भारतीय सीमा पर फंसे रह गए। ये नागरिक पाकिस्तान लौटने के लिए दिनभर अटारी बॉर्डर पर गेट खुलने का इंतजार करते रहे, लेकिन पाकिस्तान ने अपने ही नागरिकों के लिए सीमा का दरवाजा खोलने से साफ इनकार कर दिया।
इसी बीच एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम में इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के 22 अधिकारी भारत लौट आए हैं। इनमें तीन वरिष्ठ राजनयिक भी शामिल हैं, जो अटारी-वाघा सीमा के रास्ते स्वदेश पहुंचे। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है।
गुरुवार को सीमा बंद होने से पहले बुधवार को लगभग 125 पाकिस्तानी नागरिक भारत से पाकिस्तान लौट चुके थे। अब तक 1,000 से अधिक पाकिस्तानी नागरिक भारत छोड़ चुके हैं, जिनमें राजनयिकों के अलावा सहायक कर्मचारी भी शामिल हैं। हालांकि सीमा सील होने के बाद भारतीय आव्रजन विभाग द्वारा भेजे गए कुछ पाकिस्तानी नागरिक बॉर्डर पार नहीं कर सके, क्योंकि पाकिस्तान ने गेट खोलने से मना कर दिया।
भारत सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए देश में रह रहे सभी पाकिस्तानी नागरिकों को 1 मई तक भारत छोड़ने का आदेश दिया था। इसके चलते कई पाकिस्तानी नागरिक राजस्थान समेत अन्य इलाकों से लौटने के लिए बॉर्डर पहुंचे, लेकिन पाकिस्तान ने उन्हें भी अपनाने से इनकार कर दिया।
फंसे हुए नागरिकों में कई ऐसे लोग हैं जो हिंदू हैं और पाकिस्तान में गरीबी तथा धार्मिक भेदभाव के कारण भारत आए थे। इनमें गनेश नामक एक व्यक्ति ने बताया कि पाकिस्तान में न तो रोज़गार है और न ही रहने की जगह। वे दो महीने पहले ही वैध वीजा पर भारत आए थे और अब वापस लौटने पर उनके सामने परिवार का भरण-पोषण करने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
इस बीच, जानकारी मिली है कि कई भारतीय नागरिक भी पाकिस्तान की ओर फंसे हुए हैं। श्रीनगर पुलिस द्वारा डिपोर्ट की गईं दो बहनों — सईदा सगीर फातिमा (67) और सईदा जमीर फातिमा (64) — ने पाक जाने से इनकार कर दिया, क्योंकि वहां उनका कोई रिश्तेदार या संपत्ति नहीं है।
भारत-पाक संबंधों में इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दर्शा दिया है कि आतंकवाद को समर्थन देने की पाकिस्तान की नीति केवल क्षेत्रीय शांति के लिए ही नहीं, उसके अपने नागरिकों के लिए भी घातक साबित हो रही है।
